नई दिल्ली। प्याज की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 800 टन प्याज लेकर पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ बुधवार को दिल्ली पहुंचेगी। यहां उपभोक्ताओं को प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी वाली दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश के कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज निकालकर प्रमुख शहरों में भेज रही है, ताकि कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।
दिल्ली में 35 रुपये किलो मिलेगा प्याज
उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे के मुताबिक, दिल्ली में बफर स्टॉक से भेजे गए प्याज की खुदरा बिक्री NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार की दुकानों के माध्यम से की जाएगी। पहली कांदा एक्सप्रेस में करीब 800 टन प्याज दिल्ली पहुंचाया जाएगा। उपभोक्ताओं को यह प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने की योजना है।
चार और शहरों में भेजा जा रहा प्याज
सरकार सिर्फ दिल्ली में ही प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं कर रही है। चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी के लिए भी रेलवे के समर्पित रेक के जरिए प्याज भेजा जा रहा है। इन शहरों में भेजा जा रहा प्याज महाराष्ट्र के नासिक में रखे गए बफर स्टॉक का हिस्सा है। कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार इस रणनीतिक स्टॉक को बाजार में उतार रही है।
एक साल में प्याज 59 फीसदी महंगा
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 24 अगस्त 2026 को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो रही। एक साल पहले इसी दिन औसत कीमत 27.37 रुपये प्रति किलो थी। इस तरह प्याज की औसत खुदरा कीमत में करीब 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, प्याज की औसत थोक कीमत भी बढ़ी है। 24 अगस्त को यह 35.58 रुपये प्रति किलो रही, जबकि एक साल पहले थोक कीमत 21.23 रुपये प्रति किलो थी। यानी थोक कीमत में करीब 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
दिल्ली में ₹55 किलो पहुंचा प्याज
प्रमुख शहरों में भी प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- दिल्ली: ₹55 प्रति किलो
- चेन्नई: ₹60 प्रति किलो
- कोलकाता: ₹53 प्रति किलो
चेन्नई में पिछले साल प्याज की कीमत करीब 33 रुपये प्रति किलो थी, जबकि दिल्ली में यह 35 रुपये प्रति किलो थी। यानी दोनों शहरों में सालाना आधार पर काफी बढ़ोतरी हुई है।
क्या है ‘कांदा एक्सप्रेस’?
बड़े पैमाने पर प्याज की आवाजाही को तेज और सस्ता बनाने के उद्देश्य से ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल 2024-25 में शुरू की गई थी। रेलवे के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज को उत्पादक राज्यों से प्रमुख उपभोग केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत एवं समय को कम करने में मदद मिलती है।
2025-26 में 88 हजार टन प्याज भेजा गया
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 12,000 टन बफर स्टॉक प्याज लेकर 14 रेलवे रेक पांच शहरों तक भेजे गए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में इस अभियान का बड़े स्तर पर विस्तार हुआ। इस दौरान 86 रेलवे रेक के जरिए करीब 88,000 टन प्याज देश के 16 प्रमुख शहरों में पहुंचाया गया।
सरकार के पास 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक
प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार रणनीतिक बफर स्टॉक तैयार करती है। यह स्टॉक मुख्य रूप से उस समय बाजार में उतारा जाता है, जब आपूर्ति कम होने या मांग बढ़ने के कारण प्याज की कीमतों में अचानक उछाल आता है। सरकार ने 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक बनाए रखा है। यह स्टॉक मूल्य स्थिरीकरण कोष योजना के तहत विभिन्न प्याज उत्पादक राज्यों में रखा जाता है।
आगे प्याज की उपलब्धता पर्याप्त रहने की उम्मीद
सरकार के अनुसार आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में प्याज की उपलब्धता पर्याप्त रहने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ती हैं प्याज की कीमतें?
प्याज की कीमतों में आमतौर पर अगस्त-सितंबर के दौरान मौसमी तेजी देखने को मिलती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें:
- त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग
- बारिश और मौसम संबंधी व्यवधान
- आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव
- मंडियों तक आवक में उतार-चढ़ाव
- मांग के पैटर्न में बदलाव शामिल हैं।
ऐसे में सरकार द्वारा बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने और रेलवे के जरिए बड़े शहरों तक पहुंचाने का उद्देश्य कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।
दिल्ली के लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
पहली कांदा एक्सप्रेस के जरिए 800 टन प्याज दिल्ली पहुंचने और 35 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री होने से राजधानी के उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का फोकस आने वाले दिनों में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने पर है।