नई दिल्ली - देशभर में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र के नासिक से प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों तक रेलवे रेक के जरिए प्याज भेजना शुरू किया गया है। इसके लिए विशेष रूप से ‘कांदा एक्सप्रेस’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य बड़े शहरों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है।

पांच बड़े शहरों में भेजी जाएगी प्याज
शुरुआती चरण में नासिक से चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे प्रमुख बाजारों तक प्याज की आपूर्ति की जाएगी। रेलवे के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज कम समय में विभिन्न राज्यों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
एक साल में 16 रुपये से ज्यादा बढ़ी औसत कीमत
प्याज की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 27.37 रुपये प्रति किलो थी। प्रमुख शहरों की बात करें तो दिल्ली में प्याज करीब 55 रुपये, चेन्नई में 60 रुपये और कोलकाता में करीब 53 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
35 रुपये किलो में प्याज बेचने की तैयारी
महंगाई से राहत देने के लिए सरकार खुदरा बाजार में प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकारी एजेंसियों NCCF और NAFED की मदद ली जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि बफर स्टॉक से प्याज निकालकर उन बाजारों में उपलब्ध कराया जाए, जहां कीमतें ज्यादा हैं।

1.21 लाख टन का बफर स्टॉक
सरकार के पास इस साल करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है। इसी स्टॉक का इस्तेमाल बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है। रेलवे के जरिए प्याज की ढुलाई और बफर स्टॉक से खुदरा बाजार में बिक्री के फैसले से आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।