भोपाल। राजधानी भोपाल में रहवासी इलाकों में संचालित दुकानों के खिलाफ की जा रही सीलिंग कार्रवाई को लेकर व्यापारियों का विरोध अब आंदोलन में बदलने जा रहा है। दुकानों को सील किए जाने की कार्रवाई से नाराज भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज (BCCI) ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। व्यापारियों का कहना है कि वे प्रशासन और सरकार के सामने अपनी समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं, ताकि नियमों के दायरे में रहते हुए प्रभावित क्षेत्रों में कारोबार जारी रखा जा सके। चैंबर की सोमवार को हुई बैठक में आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक के बाद तय किया गया कि 26 अगस्त 2026 से व्यापारी चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। पहले चरण में भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार यानी मिंटो हॉल परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। व्यापारियों का दावा है कि इस कार्यक्रम में जिलेभर से करीब 5 हजार से अधिक कारोबारी शामिल हो सकते हैं।
सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का विरोध
भोपाल के कई रहवासी क्षेत्रों में संचालित दुकानों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई के बाद व्यापारियों में नाराजगी बढ़ी है। व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से इन इलाकों में व्यवसाय संचालित हो रहे हैं और बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका इन्हीं दुकानों पर निर्भर है। चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज का कहना है कि केवल सीलिंग की कार्रवाई करने के बजाय सरकार और प्रशासन को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे प्रभावित कारोबारी नियमों के अनुरूप अपना व्यवसाय चला सकें। व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि मास्टर प्लान में जरूरी बदलाव, मल्टी लेवल व्यवस्था या किसी अन्य वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि समस्या का समाधान ऐसा होना चाहिए, जिससे व्यापारियों को कारोबार बंद करने की स्थिति का सामना न करना पड़े।
26 अगस्त को मिंटो हॉल में होगा पहला बड़ा प्रदर्शन
व्यापारियों के आंदोलन का पहला चरण 26 अगस्त को सुबह 11 बजे शुरू होगा। प्रदर्शन का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने किया जाएगा। चैंबर के अनुसार व्यापारी करीब दो घंटे तक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे। इस दौरान रामधुन का आयोजन किया जाएगा और दोपहर करीब 1 बजे तक प्रदर्शन चलेगा। व्यापारियों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित करना है। महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना के जरिए सरकार से इस मामले में स्थायी समाधान निकालने की अपील की जाएगी।
5 हजार से ज्यादा व्यापारियों के जुटने का दावा
चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज ने पहले चरण के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में व्यापारियों के शामिल होने की बात कही है। संगठन के मुताबिक भोपाल जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से व्यापारी मिंटो हॉल पहुंचेंगे। व्यापारियों का कहना है कि सीलिंग की कार्रवाई का असर केवल दुकान संचालकों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों और उन परिवारों की आय भी प्रभावित हो सकती है, जिनकी रोजी-रोटी इन व्यवसायों से जुड़ी है। इसी वजह से चैंबर इस मामले को केवल दुकानों की कार्रवाई का मुद्दा नहीं, बल्कि रोजगार और व्यापार से जुड़ा विषय भी बता रहा है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल
आंदोलन के दौरान व्यापारियों की ओर से सरकार के सामने अपनी मांगें औपचारिक रूप से रखी जाएंगी। चैंबर पदाधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग के मंत्री को मांग पत्र भेजा जाएगा। इसके अलावा व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं सीधे उनके सामने रखने की तैयारी में है। संगठन चाहता है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे व्यापारियों और प्रशासन के बीच लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान निकाला जा सके।
मांग नहीं मानी तो आंदोलन होगा तेज
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल के मुताबिक 26 अगस्त का प्रदर्शन आंदोलन का शुरुआती चरण होगा। यदि सरकार और प्रशासन की ओर से व्यापारियों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जा सकता है। चैंबर की ओर से जरूरत पड़ने पर भोपाल बंद जैसे कदम उठाने की भी बात कही गई है। हालांकि फिलहाल व्यापारियों का जोर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने पर है।
भोपाल में बड़ी संख्या में कारोबारी प्रभावित होने का दावा
व्यापारी संगठन का दावा है कि भोपाल में छोटे-बड़े कारोबारियों की संख्या एक लाख से अधिक है। वहीं नगर निगम की कार्रवाई के दायरे में बड़ी संख्या में दुकानों के आने की बात कही जा रही है। गोविंद गोयल के अनुसार करीब 60 हजार व्यापारियों को नोटिस दिए जाने का दावा किया जा रहा है। व्यापारियों का तर्क है कि यदि बड़ी संख्या में दुकानों पर कार्रवाई होती है तो इसका सीधा असर रोजगार और कारोबार पर पड़ेगा। संगठन का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले प्रभावित व्यापारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना चाहिए, ताकि कारोबार अचानक बंद होने से परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित न हो।
व्यापारियों की क्या है मुख्य मांग?
व्यापारी संगठन चाहता है कि रहवासी क्षेत्रों में व्यवसाय से जुड़े नियमों को लेकर सरकार व्यावहारिक समाधान निकाले। इसके लिए मास्टर प्लान में आवश्यक प्रावधान, मल्टी लेवल कमर्शियल व्यवस्था या अन्य वैकल्पिक उपाय तलाशने की मांग की जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि कोई क्षेत्र पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त नहीं है तो सरकार उन्हें ऐसी जगह उपलब्ध कराने पर भी विचार करे, जहां वे नियमों के अनुसार कारोबार जारी रख सकें।
आगे क्या होगा?
26 अगस्त के प्रदर्शन के बाद सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर व्यापारियों के अगले कदम तय होंगे। यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में चैंबर ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करने के संकेत दिए हैं। फिलहाल व्यापारियों का पहला लक्ष्य बड़ी संख्या में एकजुट होकर प्रशासन और सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात इस पूरे विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।