तिरुवनंतपुरम. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के ताजा आंकड़ों के अनुसार केरल में इस मानसून सत्र के दौरान अब तक बारिश सामान्य स्तर से काफी कम रही है। 1 जून से 24 अगस्त तक राज्य में 1,278.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में सामान्य रूप से 1,671.4 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। इस प्रकार राज्य में वर्षा सामान्य से 23% कम दर्ज की गई है। निर्धारित मानकों के आधार पर केरल को फिलहाल वर्षा की कमी वाली श्रेणी में रखा गया है, जिससे राज्य में मानसून की मौजूदा स्थिति पर चिंता बढ़ी है।
कुछ जिलों में बारिश सामान्य, अधिकांश में कमी
IMD के आंकड़ों के मुताबिक केरल के सभी जिलों में वर्षा की स्थिति एक जैसी नहीं रही है। कन्नूर, कासरगोड, कोट्टायम, कोझिकोड, पत्तनमतिट्टा और तिरुवनंतपुरम में इस अवधि के दौरान वर्षा को सामान्य श्रेणी में दर्ज किया गया है। इसके विपरीत राज्य के बाकी जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है और उन्हें वर्षा की कमी वाली श्रेणी में रखा गया है। इससे स्पष्ट है कि मानसून की गतिविधियां राज्य के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में असमान बनी हुई हैं और कई हिस्सों को अपेक्षित वर्षा नहीं मिल सकी है।
वायनाड में सबसे अधिक 51% वर्षा की कमी
केरल के जिलों में वायनाड में वर्षा की कमी सबसे अधिक दर्ज की गई है। यहां 1 जून से 24 अगस्त के बीच केवल 1,039.7 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य स्थिति में इस अवधि तक 2,114.7 मिमी वर्षा होने की उम्मीद रहती है। इस प्रकार वायनाड में सामान्य से 51% कम बारिश दर्ज की गई। पहाड़ी और कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण यहां मानसून की स्थिति का विशेष महत्व है। वर्षा में इतनी बड़ी कमी का असर स्थानीय जल संसाधनों, खेती और क्षेत्र की समग्र पारिस्थितिकी पर पड़ सकता है, हालांकि आगे के मानसूनी दौर में होने वाली बारिश से स्थिति में कुछ बदलाव संभव है।
इडुक्की में भी 45% कम बरसे बादल
वर्षा की कमी के मामले में इडुक्की दूसरे स्थान पर रहा, जहां सामान्य से 45% कम बारिश दर्ज की गई। जिले में इस अवधि के दौरान 1,147.4 मिमी वर्षा हुई, जबकि सामान्य औसत 2,092.5 मिमी है। इडुक्की का भौगोलिक महत्व जल संसाधनों और वर्षा आधारित पारिस्थितिकी के लिहाज से काफी अधिक है। ऐसे में मानसून के दौरान लगातार कम वर्षा दर्ज होना स्थानीय स्तर पर जल उपलब्धता और कृषि गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। राज्य के अन्य कम वर्षा वाले जिलों के साथ इडुक्की की स्थिति भी मानसून के आगे के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
कोल्लम, त्रिशूर और पालक्काड में भी सामान्य से कम बारिश
IMD के आंकड़ों में कोल्लम में सामान्य से 30% कम वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा त्रिशूर और लक्षद्वीप में 27% की कमी दर्ज की गई, जबकि पालक्काड में सामान्य से 26% कम बारिश हुई। लगातार कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज होने से यह स्पष्ट है कि मानसून की कमजोरी केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में कमी का स्तर अलग जरूर है, लेकिन राज्य के अधिकांश हिस्से अब तक अपेक्षित मानसूनी वर्षा से पीछे चल रहे हैं।
अलप्पुझा, एर्नाकुलम और मलप्पुरम में भी बना रहा घाटा
अलप्पुझा में इस अवधि के दौरान 983.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य रूप से 1,306.1 मिमी बारिश अपेक्षित थी। इस प्रकार जिले में 25% की कमी रही। एर्नाकुलम में सामान्य से 22% कम और मलप्पुरम में 21% कम बारिश दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि केरल के तटीय, मध्य और आंतरिक क्षेत्रों में वर्षा का वितरण संतुलित नहीं रहा है। मानसून की आगे की गतिविधियां तय करेंगी कि राज्य इस कमी को किस हद तक पूरा कर पाता है।
कृषि और जल संसाधनों पर रहेगी नजर
केरल में मानसून केवल मौसम की एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि कृषि, नदियों, जलाशयों और व्यापक प्राकृतिक तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामान्य से कम वर्षा की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर धान, बागवानी और अन्य कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है। साथ ही जलाशयों में जल संग्रह और भूजल पुनर्भरण की स्थिति भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। हालांकि मानसून सत्र अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में सक्रिय वर्षा प्रणालियां कुछ क्षेत्रों में कमी की भरपाई कर सकती हैं।
आगे की बारिश से सुधर सकती है तस्वीर
मानसून के दौरान वर्षा का वितरण अक्सर अलग-अलग समय पर बदलता रहता है और किसी एक अवधि के आंकड़े पूरे मौसम की अंतिम तस्वीर नहीं होते। फिर भी 24 अगस्त तक सामान्य से 23% कम बारिश के आंकड़े ने केरल में मानसून की कमजोर स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। अब मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमानों और अगले चरण की वर्षा पर नजर रहेगी कि क्या राज्य के विभिन्न जिले इस कमी को कुछ हद तक पूरा कर पाते हैं। विशेष रूप से वायनाड और इडुक्की जैसे अधिक वर्षा घाटे वाले क्षेत्रों में आने वाले दिनों की बारिश महत्वपूर्ण होगी।