नई दिल्ली। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की ओर से एक बार फिर देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया गया है। 5 डे वर्किंग यानी सप्ताह में केवल पांच दिन बैंक खोलने की मांग और सरकार की बदली हुई परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को वापस लेने की मांग को लेकर बैंक यूनियनों ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के 9 प्रमुख संगठनों के साझा मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने सितंबर 2026 से आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया है। यूनियन के मुताबिक पहले चरण में एक दिन की देशव्यापी हड़ताल होगी। इसके बाद सितंबर के अंत में लगातार तीन दिनों तक बैंक बंद रखने का ऐलान किया गया है। अगर इस दौरान सरकार की ओर से मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता है, तो बैंक कर्मचारी और अधिकारी 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे रहे हैं।
5 डे वर्किंग को लेकर बैंक कर्मचारियों का दबाव
बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांग लंबे समय से चली आ रही 5 डे बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की है। इसका मतलब है कि बैंक कर्मचारियों को सप्ताह में पांच दिन काम करना होगा और शनिवार-रविवार को नियमित अवकाश रहेगा। यूनियन का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाना जरूरी है। UFBU ने इसी मांग को लेकर सरकार पर फैसला लेने का दबाव बढ़ाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
11 सितंबर को एक दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल
UFBU के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक 11 सितंबर 2026, शुक्रवार को देशभर में बैंक कर्मचारी और अधिकारी एक दिन की हड़ताल पर रहेंगे। चूंकि इसके ठीक बाद शनिवार और रविवार पड़ेंगे, इसलिए बैंकिंग सेवाओं पर लगातार कई दिनों तक असर पड़ने की संभावना रहेगी। यानी जिन ग्राहकों को बैंक शाखा जाकर जरूरी काम निपटाना है, उन्हें इस अवधि को ध्यान में रखकर अपनी बैंकिंग गतिविधियों की योजना बनानी पड़ सकती है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग, ATM और अन्य ऑनलाइन सेवाओं की उपलब्धता अलग-अलग बैंक और सेवा के हिसाब से बनी रह सकती है, लेकिन हड़ताल का असर शाखाओं से जुड़े कामकाज पर पड़ सकता है।
सितंबर के अंत में लगातार तीन दिन हड़ताल
UFBU ने आंदोलन का दूसरा बड़ा चरण 28 से 30 सितंबर 2026 तक रखा है। इन तीन दिनों के दौरान देशभर में बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर रहेंगे। खास बात यह है कि यह अवधि बैंकों के छमाही क्लोजिंग से जुड़ी रहती है। ऐसे समय में बैंकिंग कामकाज पहले से ही महत्वपूर्ण रहता है। ऐसे में लगातार तीन दिन की हड़ताल का असर ग्राहकों के साथ-साथ बैंकिंग लेनदेन और शाखाओं से जुड़े कामों पर भी पड़ सकता है। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि सितंबर में घोषित आंदोलन के बाद भी यदि उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से कोई समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
बैंक यूनियनों ने सरकार को सबसे बड़ा अल्टीमेटम अक्टूबर के लिए दिया है। UFBU के अनुसार यदि सितंबर में प्रस्तावित हड़तालों के बावजूद उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल शुरू की जाएगी। अनिश्चितकालीन हड़ताल का मतलब है कि आंदोलन की कोई निश्चित अंतिम तारीख पहले से तय नहीं होगी। यानी मांगों पर समाधान होने तक बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का आंदोलन जारी रह सकता है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर देशभर में बैंक शाखाओं के सामान्य कामकाज पर काफी व्यापक हो सकता है।
PLI स्कीम को वापस लेने की भी मांग
5 डे वर्किंग के अलावा बैंक यूनियनों ने सरकार की बदली हुई Performance Linked Incentive (PLI) व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति जताई है। UFBU का कहना है कि नई व्यवस्था को वापस लिया जाना चाहिए। यूनियन इस मुद्दे को भी अपने आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल कर रही है। बैंक कर्मचारियों के संगठनों का आरोप है कि सरकार का रुख उनकी मांगों के प्रति सकारात्मक नहीं रहा है। इसी के विरोध में अब चरणबद्ध तरीके से हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
UFBU में कौन-कौन से संगठन शामिल हैं?
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की 9 प्रमुख यूनियनों का साझा मंच United Forum of Bank Unions (UFBU) इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। UFBU अलग-अलग बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों को एक मंच पर लाकर बैंकिंग सेक्टर से जुड़े मुद्दों पर सरकार और बैंक प्रबंधन के सामने सामूहिक रूप से अपनी मांगें रखता है। इस बार भी 5 डे वर्किंग और PLI से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त रूप से आंदोलन का फैसला किया गया है।
ग्राहकों पर क्या पड़ सकता है असर?
अगर घोषित कार्यक्रम के अनुसार हड़ताल होती है तो बैंक ग्राहकों को शाखा से जुड़े कई कामों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खास तौर पर चेक, कैश, ड्राफ्ट, दस्तावेज जमा करने, बैंक शाखा में होने वाले अन्य कार्यों और कुछ सेवाओं के लिए ग्राहकों को हड़ताल की तारीखों को ध्यान में रखना होगा। 11 सितंबर की हड़ताल शुक्रवार को है और उसके बाद शनिवार-रविवार की छुट्टी रहेगी। वहीं 28 से 30 सितंबर तक लगातार तीन दिनों की हड़ताल की घोषणा की गई है। इसलिए ग्राहकों के लिए जरूरी होगा कि वे पहले से अपने जरूरी बैंकिंग काम निपटा लें और अपने बैंक की ओर से जारी किसी एडवाइजरी पर भी नजर रखें।
अक्टूबर की हड़ताल हुई तो बढ़ सकता है असर
सितंबर की हड़तालों के बाद भी अगर बातचीत के जरिए कोई समाधान नहीं निकलता है और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होती है, तो बैंकिंग सेवाओं पर इसका असर कहीं ज्यादा व्यापक हो सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति सरकार और बैंक यूनियनों के बीच होने वाली बातचीत तथा आगे के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। मांगों पर सहमति बनने की स्थिति में आंदोलन के कार्यक्रम में बदलाव भी संभव हो सकता है। फिलहाल UFBU ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने स्पष्ट समयसीमा और आंदोलन का कार्यक्रम रख दिया है।