कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) में हाल की हिंसा, तोड़फोड़ और कथित तौर पर बिगड़े शैक्षणिक माहौल को लेकर अब दक्षिणपंथी छात्र, शिक्षक और मजदूर संगठनों ने विरोध का ऐलान किया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), भारतीय मजदूर संघ (BMS) और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) की ओर से आज, सोमवार 24 अगस्त 2026, को जादवपुर विश्वविद्यालय में संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सबसे पहले विश्वविद्यालय के प्रशासनिक केंद्र अॉरबिंदो भवन के सामने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इसके बाद शाम करीब 4 बजे दक्षिणापण से विरोध जुलूस और धिक्कार सभा आयोजित की जाएगी।
अॉरबिंदो भवन के सामने होगी संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस
ABVP, BMS और ABRSM की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जादवपुर विश्वविद्यालय के मौजूदा माहौल को लेकर संगठन अपना पक्ष रखेंगे। संगठनों की ओर से जारी पोस्टरों में “जादवपुर विश्वविद्यालय में प्रतिक्रियावादी कम्युनिस्ट षड्यंत्र विफल करो” और “शिक्षा बचाओ, जादवपुर बचाओ” जैसे नारे दिए गए हैं। हालिया FETSU बैठक के दौरान हुई झड़प, विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार को हुए नुकसान और ऐतिहासिक प्रतीक के क्षतिग्रस्त होने की घटना को लेकर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाए जाएंगे। ABRSM की ओर से विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने और स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है।
दक्षिणापण से शाम 4 बजे निकलेगा विरोध जुलूस
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शाम 4 बजे “पश्चिम बंगाल के सचेतन नागरिक एवं प्रबुद्ध समाज” के आह्वान पर विरोध सभा और जुलूस आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में जादवपुर विश्वविद्यालय में कथित अराजकता, हिंसा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। आयोजकों की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की अपील की गई है। कार्यक्रम के दौरान “शिक्षा बचाओ” और “जादवपुर बचाओ” जैसे नारों के जरिए विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण बहाल करने की मांग उठाई जाएगी।
हालिया हिंसा के बाद बढ़ी सुरक्षा
जादवपुर विश्वविद्यालय में पिछले दिनों हुई झड़पों और गेट से जुड़े विवाद के बाद परिसर तथा आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। विश्वविद्यालय के आसपास और 8B बस स्टैंड क्षेत्र में पुलिस एवं सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी बनी हुई है। आज प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भी प्रशासन की नजर कार्यक्रमों पर रहेगी। आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण की बहाली, हिंसा पर रोक और निष्पक्ष जांच की मांग को मजबूती से सामने रखना है। हालांकि, “कम्युनिस्ट साजिश”, “राष्ट्रविरोधी नारे” या किसी संगठन की भूमिका से जुड़े आरोप आयोजकों के दावे हैं; इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।