भोपाल। मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सोमवार, 24 अगस्त को “Contribution of Centrally Funded Institutions for Samriddh Madhya Pradesh @2047” विषय पर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। इसमें देश के प्रमुख केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश के विकास को लेकर अपने सुझाव और योजनाएं सामने रखीं। इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIGGPA) की ओर से किया गया। कार्यक्रम की थीम “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” रखी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” स्मारिका का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में चर्चा केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रिसर्च, खेल, पर्यटन, स्मार्ट विलेज, कृषि, रोजगार और निवेश जैसे क्षेत्रों को मध्यप्रदेश के भविष्य से जोड़कर देखा गया।
जामवंत की तरह प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को उसकी ताकत का अहसास कराया: CM
कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की चर्चा करते हुए रामायण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीराम की सेना युद्ध के लिए तैयार थी, उस समय जामवंत ने भगवान हनुमान को उनकी शक्ति का अहसास कराया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देश को उसकी सामर्थ्य का एहसास कराने में इसी तरह की भूमिका निभा रहे हैं। डॉ. यादव के मुताबिक भारत के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन देश में हर चुनौती से निपटने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश ने कई ऐसे बदलाव देखे हैं, जिन्हें कुछ समय पहले तक कल्पना करना भी मुश्किल था। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित होने को इसी बदलते दौर का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब उन क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है, जिनके बारे में कुछ वर्ष पहले तक कल्पना करना कठिन था।
मध्यप्रदेश के विकास के लिए केंद्रीय संस्थानों की भूमिका अहम
मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉन्क्लेव में देश के अलग-अलग केंद्रीय संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों और विद्वानों की मौजूदगी अपने आप में महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन संस्थानों की विशेषज्ञता और मध्यप्रदेश की विकास जरूरतों को एक साथ जोड़ने से प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए नई दिशा तैयार होगी। सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। इसके तहत रिसर्च, इनोवेशन, तकनीक, रोजगार, निवेश, उद्यमिता और मानव पूंजी को भी विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया गया।
इजराइल, जापान और पाकिस्तान का उदाहरण देकर बताई विकास की चुनौती
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में दुनिया के कुछ देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी देश की वर्तमान स्थिति उसके अतीत से तय नहीं होती, बल्कि उसकी नीतियां और विकास की दिशा उसे आगे ले जाती हैं। उन्होंने कहा कि इजराइल भारत की आजादी के बाद अस्तित्व में आया, जबकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा था। इसके बावजूद दोनों देशों ने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की। मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एक समय पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारत से बेहतर माना जाता था, लेकिन आज दोनों देशों की स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई देता है। उनका कहना था कि इन उदाहरणों से यह समझ आता है कि किसी देश या राज्य को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास, बेहतर नीतियां और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल जरूरी है।
सेना की ताकत से लेकर ड्रोन टेक्नोलॉजी तक बदला युद्ध का स्वरूप
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में बदलती तकनीक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह दौर पीछे छूट चुका है जब दुश्मन भारतीय सैनिकों के साथ मनमानी कर सकता था। भारत ने थल, जल और नभ तीनों क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है। ड्रोन टेक्नोलॉजी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक ने युद्ध की प्रकृति को काफी बदल दिया है। ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने आधुनिक युद्ध में तकनीकी क्षमता की भूमिका पर जोर दिया। इसी वजह से उन्होंने मध्यप्रदेश में भी रक्षा क्षेत्र से जुड़े तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की जरूरत बताई।
कृषि से युवाओं की दूरी को CM ने बताया बड़ी चुनौती
मध्यप्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की बड़ी भूमिका होने के बावजूद युवाओं का खेती की ओर कम आकर्षित होना मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि आज बहुत कम युवा यह कहते हैं कि वे खेती को अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। जबकि मध्यप्रदेश सहित पूरा देश लंबे समय से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का हिस्सा रहा है। मुख्यमंत्री ने कृषि को आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, रोजगार और आय से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि कृषि को नई तकनीक और नए अवसरों से जोड़ा जाए तो युवाओं की इसमें रुचि बढ़ाई जा सकती है।
55 साल में साढ़े सात लाख हेक्टेयर तक पहुंचा सिंचाई क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में सिंचाई के विस्तार का आंकड़ा साझा करते हुए कहा कि वर्ष 1956 में राज्य के गठन से लेकर 2002-03 तक सिंचाई क्षेत्र लगभग साढ़े सात लाख हेक्टेयर तक पहुंच पाया था। उन्होंने इस आंकड़े के जरिए बताया कि सिंचाई के क्षेत्र को विस्तार देने में लंबे समय का समय लगा। अब राज्य में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को और तेज करने की जरूरत है। डॉ. यादव ने नदी जोड़ो परियोजनाओं को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
नदी जोड़ो अभियान से सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा
मुख्यमंत्री ने नदी जोड़ो अभियान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि नदियों को जोड़ने की योजनाओं से सिंचाई क्षेत्र का विस्तार किया जा सकता है। उन्होंने दक्षिण भारत में बाढ़ की स्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में अतिरिक्त पानी समस्या बन जाता है, जबकि दूसरी जगह पानी की आवश्यकता होती है। यदि नदियों को व्यवस्थित तरीके से जोड़ा जाता है तो पानी के बेहतर प्रबंधन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्यों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। उनका संदेश था कि एक राज्य की प्रगति अंततः पूरे देश की प्रगति से जुड़ी होती है।
PKC योजना से मध्यप्रदेश के 15 जिलों को लाभ की उम्मीद
राजस्थान के साथ लंबे समय से चल रहे पानी के बंटवारे के विवाद का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने पीकेसी योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि योजना के जरिए राजस्थान के 15 जिलों और मध्यप्रदेश के 15 जिलों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के अनुसार इससे संबंधित क्षेत्रों में पानी और सिंचाई की उपलब्धता बढ़ेगी और कई इलाकों को हराभरा बनाने में मदद मिल सकती है। इस परियोजना को उन्होंने राज्यों के बीच सहयोग और साझा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मैन्युफैक्चरिंग से AI तक MP को आगे ले जाने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैज्ञानिक प्रकाशनों से लेकर पेटेंट तक एक पूरा इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए केवल उद्योग लगाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ रिसर्च, नवाचार, तकनीक, डिजिटल सेवाएं और कुशल मानव संसाधन को भी मजबूत करना होगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक आने वाले समय में स्किल नई करेंसी और इनोवेशन नई इकोनॉमी की भूमिका निभाएगा।
डिजिटल पेमेंट और AI से सुशासन को मजबूत करने पर जोर
कॉन्क्लेव में तकनीक आधारित प्रशासन को भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल पेमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में तकनीक केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका बढ़ेगी।
मानव पूंजी और रोजगार को विकास के केंद्र में रखने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए मानव पूंजी को सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए युवाओं को बेहतर कौशल, रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। इसके साथ ही निवेश और नवाचार को बढ़ावा देना होगा, ताकि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हों। उन्होंने क्षेत्रीय संतुलन और समावेशी विकास को भी महत्वपूर्ण बताया, ताकि विकास का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे।
मुख्य सचिव ने कहा- 2047 का लक्ष्य सिर्फ सरकार का नहीं
मुख्य सचिव अशोक वर्णबाल ने कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” विजन डॉक्यूमेंट विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को विकसित बनाने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। मुख्य सचिव के अनुसार इसमें सरकार के साथ-साथ सिविल सोसाइटी, उद्यमी, शिक्षण एवं शोध संस्थान और आम नागरिक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश को केवल औद्योगिक निवेश नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट चाहिए जो वास्तविक वैल्यू पैदा करे और मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय वैल्यू चेन में मजबूत स्थान दिलाए।
2029 को बनाया गया महत्वपूर्ण चेक प्वाइंट
मुख्य सचिव ने कहा कि 2047 का लक्ष्य लंबी अवधि का है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए बीच में कई पड़ाव तय करने होंगे। इसी क्रम में 2029 को एक महत्वपूर्ण चेक प्वाइंट के रूप में देखा जा रहा है। इससे सरकार और संस्थानों को यह आकलन करने का अवसर मिलेगा कि प्रदेश ने अपने दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में कितनी प्रगति की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के हर वर्ग को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
केंद्रीय संस्थानों ने सामने रखा अपना-अपना रोडमैप
कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा भी की। इस सत्र का संचालन AIGGPA के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर संतोष कुमार विश्वकर्मा ने किया। इस दौरान अलग-अलग संस्थानों ने मध्यप्रदेश के विकास में अपने योगदान की संभावनाएं बताईं।
NITRR ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर जताई संभावना
NITRR के प्रतिनिधि ने मध्यप्रदेश को सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के विकास के लिए अनुकूल स्थान बताया। संस्थान की ओर से इस क्षेत्र में तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता के जरिए राज्य के साथ काम करने की बात कही गई। सेमीकंडक्टर सेक्टर को भविष्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश की मौजूदगी राज्य के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
IIIT भोपाल का साइबर सिक्योरिटी और डेटा पर फोकस
IIIT भोपाल के प्रतिनिधि ने साइबर सिक्योरिटी और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत बताई। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ रही है। ऐसे में राज्य में साइबर सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों और तकनीकी क्षमता को विकसित करना आने वाले वर्षों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
भारतीय सेना ने ड्रोन टेक्नोलॉजी पर दिया जोर
भारतीय सेना की ओर से मेजर जनरल विकास ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करने की जरूरत बताई। ड्रोन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए तकनीकी अनुसंधान, निर्माण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश के लिए संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।
MANIT भोपाल होम स्टे प्रशिक्षण में कर रहा काम
MANIT भोपाल के निदेशक ने बताया कि संस्थान मध्यप्रदेश में होम स्टे प्रशिक्षण के लिए काम कर रहा है। पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने के लिए होम स्टे मॉडल महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर काम किया जा रहा है।
LNIPE ने खेल और शारीरिक शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही
LNIPE की प्रतिनिधि ने प्रदेश में शारीरिक शिक्षा और खेलों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत बताई। खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के क्षेत्र में संस्थान की भूमिका को भी सामने रखा गया।
AMPRI वैज्ञानिक प्रशिक्षण से युवाओं को रोजगार से जोड़ेगा
AMPRI के प्रतिनिधि ने बताया कि राज्य के युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण के जरिए रोजगार से जोड़ने के लिए काम किया जा रहा है। संस्थान ने क्रिटिकल एलिमेंट्स से जुड़े अनुसंधान में भी योगदान देने की बात कही। इसके अलावा रायसेन जिले के जनकपुर गांव को CSR के तहत गोद लिया गया है। गांव को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने के प्रयास चल रहे हैं। संस्थान के अनुसार अगले दो वर्षों में करीब 4 से 5 करोड़ रुपये का निवेश और CSR के जरिए तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की योजना है। जनकपुर देश के उन पांच चयनित गांवों में शामिल है, जिन्हें स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। AMPRI की ओर से सिंहस्थ 2028 के लिए भी CSR के माध्यम से सहयोग जारी रखने की बात कही गई।
IIT इंदौर से IIM इंदौर तक संस्थानों ने बताई योजनाएं
कॉन्क्लेव में IIT इंदौर, IISER भोपाल, IIM इंदौर और School of Planning and Architecture के निदेशकों ने भी विकसित मध्यप्रदेश के लिए अपनी-अपनी योजनाएं और संभावित योगदान सामने रखा। इन संस्थानों की विशेषज्ञता को राज्य की विकास प्राथमिकताओं से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस तरह कॉन्क्लेव में शिक्षा और शोध संस्थानों को केवल अकादमिक क्षेत्र तक सीमित न रखकर उन्हें प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा दिखाई गई।
“वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” से विकास को मिलेगी संस्थागत ताकत
इस कॉन्क्लेव की थीम “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” रखी गई थी। इसका उद्देश्य केंद्रीय संस्थानों को मध्यप्रदेश के विकास के लिए एक स्पष्ट योगदान और जिम्मेदारी के साथ जोड़ना रहा। कार्यक्रम में सामने आए प्रस्तावों से यह संकेत मिला कि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में अलग-अलग संस्थानों की विशेषज्ञता को कृषि, उद्योग, तकनीक, पर्यटन, रक्षा, शिक्षा, खेल और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों के साथ जोड़ना चाहती है। यदि इन योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे प्रदेश के लिए शोध और तकनीक आधारित विकास का नया मॉडल तैयार हो सकता है।