भोपाल/आलीराजपुर। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के नाम और पद का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर ट्रांसफर कराने की कोशिश का मामला सामने आया है। आलीराजपुर पुलिस ने मुख्यमंत्री के फर्जी लेटरहेड तैयार कर उसे सरकारी अधिकारियों को भेजने के आरोप में मुकेश राम सिंह भोसले को गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी ने यह फर्जी लेटरहेड इंदौर से तैयार करवाया था। इसके बाद उसे अपने मोबाइल नंबर से आलीराजपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को भेजा गया। लेटर में एक संविदा आयुष अधिकारी के ट्रांसफर की सिफारिश की गई थी। मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने केवल इसी मामले के लिए फर्जी लेटर तैयार करवाया था या इससे पहले भी इस तरह के अन्य दस्तावेज बनवाए गए हैं।
डॉक्टर का उदयगढ़ से सोंडवा ट्रांसफर कराने का था मामला
पूरा मामला संविदा आयुष अधिकारी डॉ. निर्मला निंगवाल से जुड़ा बताया जा रहा है। डॉ. निंगवाल उदयगढ़ में पदस्थ थीं और अपना ट्रांसफर सोंडवा करवाना चाहती थीं। इसी दौरान उनके ड्राइवर नवल सिंह सस्तिया का संपर्क मुकेश भोसले से हुआ। आरोप है कि मुकेश ने ड्राइवर को भरोसा दिलाया कि वह डॉक्टर का ट्रांसफर कराने में मदद कर सकता है। इसके बाद ट्रांसफर के लिए कथित तौर पर 40 हजार रुपये एडवांस में लेने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस लेनदेन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
12 जुलाई 2026 की तारीख वाला फर्जी लेटर तैयार किया
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, सौदा तय होने के बाद मुकेश भोसले ने मुख्यमंत्री के नाम से एक कथित फर्जी लेटर तैयार करवाया। इस पत्र पर 12 जुलाई 2026 की तारीख दर्ज थी। लेटरहेड पर मुख्यमंत्री का फोटो और मध्यप्रदेश शासन से संबंधित पहचान का इस्तेमाल किया गया था। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार होने के बाद मुकेश ने इसे अपने मोबाइल नंबर से आलीराजपुर के CMHO डॉ. राजेश अतुलकर को WhatsApp के माध्यम से भेजा। यहीं से पूरा मामला पुलिस जांच के दायरे में आ गया।
CMHO को लेटर देखते ही हुआ शक
CMHO डॉ. राजेश अतुलकर को दस्तावेज की सत्यता पर संदेह हुआ। लेटरहेड पर मुख्यमंत्री का फोटो और सरकारी पहचान से जुड़ी चीजें देखकर उन्होंने इसे सामान्य सरकारी पत्र नहीं माना। संदेह होने के बाद CMHO ने पत्र को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाने का फैसला किया। उन्होंने इंदौर में संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को यह दस्तावेज भेजकर उसकी पुष्टि कराई। वहां से स्पष्ट किया गया कि इस तरह का कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। इसके बाद मामला गंभीर हो गया और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू की गई।
करीब एक महीने तक हुई जांच, फिर पुलिस में शिकायत
फर्जी लेटर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय मामले की जांच की। CMHO ने संबंधित डॉक्टर और उनके ड्राइवर से भी पूछताछ की। दस्तावेज कहां से आया, किसने भेजा और ट्रांसफर की सिफारिश के पीछे कौन लोग हैं, इन सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई गई। करीब एक महीने की जांच-पड़ताल के बाद CMHO ने आलीराजपुर कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई और फर्जी लेटरहेड तैयार करने वाले आरोपी तक पहुंची।
सीहोर के श्यामपुर से पकड़ा गया आरोपी
पुलिस जांच में फर्जी लेटर भेजने वाले व्यक्ति की पहचान मुकेश राम सिंह भोसले के रूप में हुई। आरोपी सीहोर जिले के श्यामपुर क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की पूछताछ के लिए रिमांड लेने की कार्रवाई की गई। अब पुलिस आरोपी से यह जानने की कोशिश कर रही है कि फर्जी लेटरहेड तैयार कराने के पीछे उसका उद्देश्य क्या था और इस काम में उसके साथ कोई दूसरा व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
इंदौर में उस जगह पहुंच सकती है पुलिस जहां तैयार हुआ लेटरहेड
जांच में आरोपी ने कथित तौर पर बताया है कि मुख्यमंत्री का फर्जी लेटरहेड इंदौर से बनवाया गया था। अब पुलिस उस स्थान की जानकारी जुटा रही है, जहां से यह दस्तावेज तैयार कराया गया था। पुलिस की टीम इंदौर में संबंधित जगह पर दबिश देने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि लेटरहेड डिजिटल तरीके से तैयार किया गया था या किसी प्रिंटिंग व्यवस्था के जरिए इसे बनाया गया। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि आरोपी ने पहले कितने फर्जी सरकारी दस्तावेज या लेटरहेड तैयार करवाए हैं।
सिर्फ एक लेटर या बड़ा नेटवर्क? पुलिस खंगाल रही कड़ियां
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल एक व्यक्ति द्वारा किया गया प्रयास था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। अगर आरोपी ने पहले भी इसी तरह के सरकारी लेटरहेड तैयार करवाए हैं, तो उनसे जुड़े अन्य मामलों की जानकारी भी सामने आ सकती है। पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, संपर्कों और कथित लेटर तैयार कराने से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटा सकती है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल केवल डॉक्टर के ट्रांसफर के लिए होना था या इसके पीछे कोई और उद्देश्य भी था।
जिस नंबर से पत्र भेजा गया, उसकी भी जांच
CMHO के मुताबिक, जिस मोबाइल नंबर से मुख्यमंत्री का कथित फर्जी लेटरहेड WhatsApp पर भेजा गया था, उसकी प्रोफाइल पर मध्यप्रदेश शासन का लोगो लगा हुआ था। यह बात भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि सरकारी पहचान का इस्तेमाल करने से दस्तावेज को वास्तविक दिखाने की कोशिश की गई हो सकती है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
डॉक्टर और ड्राइवर की भूमिका भी जांच के दायरे में
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने फिलहाल डॉक्टर और उनके ड्राइवर की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। डॉक्टर का ट्रांसफर कराने के लिए ड्राइवर और आरोपी के बीच संपर्क होने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि डॉक्टर को फर्जी लेटरहेड की जानकारी थी या नहीं और पूरे मामले में ड्राइवर की भूमिका क्या रही। पुलिस जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में किन लोगों की संलिप्तता थी और किस स्तर तक यह मामला जुड़ा हुआ है।
सरकारी लेटरहेड के दुरुपयोग ने बढ़ाई चिंता
मुख्यमंत्री कार्यालय या राज्य सरकार के नाम का इस्तेमाल करके फर्जी दस्तावेज तैयार करना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर मामला माना जाता है। सरकारी लेटरहेड पर किसी अधिकारी के ट्रांसफर या पदस्थापना से संबंधित सिफारिश होने पर संबंधित विभाग के अधिकारियों के लिए उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी हो जाता है। इस मामले में CMHO को समय रहते संदेह होने और वरिष्ठ अधिकारियों से पुष्टि कराने के कारण कथित फर्जी दस्तावेज की हकीकत सामने आ गई। अब पुलिस की जांच यह तय करेगी कि फर्जी लेटर तैयार कराने और उसका इस्तेमाल करने के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी।