भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रस्तावित योजना के तहत जुलाई में होने वाले निकाय चुनाव और उसके बाद प्रस्तावित पंचायत चुनाव को एक साथ कराने की संभावना पर काम किया जा रहा है। आयोग का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक तेज और व्यवस्थित बनाना है, ताकि अलग-अलग चुनावों के कारण बार-बार और लंबे समय तक लागू रहने वाली आदर्श आचार संहिता की अवधि को कम किया जा सके।
एक साथ चुनाव कराने पर जोर
मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव अलग-अलग समय पर कराए जाते हैं। पंचायत चुनाव भी कई चरणों में होने के कारण चुनाव प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है। इस दौरान आदर्श आचार संहिता लागू रहने से कई विकास कार्य प्रभावित होते हैं। इसी समस्या को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया में प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर बदलाव की तैयारी कर रहा है। अगर दोनों चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था बनती है, तो एक ही अवधि में चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जा सकेगा।
जुलाई में निकाय चुनाव प्रस्तावित
मध्य प्रदेश में अगले साल जुलाई में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके बाद पंचायत चुनाव कराए जाने हैं। आयोग की कोशिश है कि दोनों चुनावों के कार्यक्रम में ऐसा समन्वय बनाया जाए, जिससे इन्हें एक साथ या अधिकतम कम अंतराल में कराया जा सके। हालांकि, चुनाव की अंतिम तारीख और कार्यक्रम निर्वाचन आयोग की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
तीन चरणों में चुनाव से बढ़ती है आचार संहिता की अवधि
पंचायत चुनावों के तीन चरणों में होने के कारण चुनाव प्रक्रिया काफी लंबी हो जाती है। अलग-अलग चरणों में मतदान और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं के चलते संबंधित क्षेत्रों में लंबे समय तक आदर्श आचार संहिता लागू रहती है। इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं, नई घोषणाओं और विकास कार्यों पर पड़ता है। चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक कई प्रशासनिक और विकास संबंधी फैसले प्रभावित होते हैं।
चुनाव एक साथ हुए तो क्या होगा फायदा?
निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था लागू होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा आदर्श आचार संहिता की अवधि कम होने के रूप में सामने आ सकता है।
इसके अलावा:
- प्रशासनिक मशीनरी को बार-बार चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाना पड़ेगा।
- सुरक्षा बलों की तैनाती को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा।
- चुनाव सामग्री और संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल हो सकेगा।
- मतदान प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाया जा सकेगा।
- विकास कार्यों पर लंबे समय तक आचार संहिता का असर कम हो सकता है।
- सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर बार-बार चुनावी जिम्मेदारियों का दबाव कम होगा।
प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव की तैयारी
राज्य निर्वाचन आयोग चुनावों को एक साथ कराने की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसके तहत चुनाव प्रबंधन, मतदान प्रक्रिया, कर्मचारियों की तैनाती और अन्य व्यवस्थाओं को एक साथ संचालित करने की क्षमता पर काम किया जा सकता है। एक साथ चुनाव कराने के लिए बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों, कर्मचारियों, सुरक्षा बलों और चुनाव सामग्री की आवश्यकता होगी। ऐसे में आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों चुनावों के लिए पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता और प्रभावी प्रबंधन की होगी।
विकास कार्यों पर कम पड़ेगा असर
राज्य निर्वाचन आयोग का मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को इस तरह व्यवस्थित करना है कि विकास कार्य लंबे समय तक आचार संहिता के कारण प्रभावित न हों। यदि निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था सफल होती है, तो प्रदेश में चुनाव संबंधी गतिविधियों की कुल अवधि कम की जा सकती है। इससे प्रशासन को चुनाव के बाद विकास योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों पर तेजी से काम करने का अवसर मिलेगा। फिलहाल यह योजना तैयारी के स्तर पर है। चुनाव की तारीख, चरणों और एक साथ चुनाव कराने की अंतिम व्यवस्था को लेकर आधिकारिक निर्णय और विस्तृत कार्यक्रम बाद में सामने आएगा।