उज्जैन: मध्य प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक शहर उज्जैन में महाकाल लोक के बाद अब ‘बुद्ध लोक’ विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत शहर की प्राचीन बौद्ध विरासत को सामने लाने के लिए करीब 2200 साल पुराने स्तूप के उत्खनन की योजना बनाई जा रही है। इस पहल से उज्जैन के धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ऐतिहासिक और बौद्ध पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
2200 साल पुराने स्तूप से सामने आएगा प्राचीन इतिहास
उज्जैन में प्रस्तावित ‘बुद्ध लोक’ की योजना के तहत प्राचीन बौद्ध अवशेषों को संरक्षित और विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में करीब 2200 वर्ष पुराने स्तूप का उत्खनन किया जाएगा। पुरातात्विक उत्खनन के बाद इस क्षेत्र में मौजूद प्राचीन संरचनाओं, अवशेषों और बौद्ध काल से जुड़े इतिहास को सामने लाने की कोशिश होगी। इससे उज्जैन के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को पर्यटकों और आम लोगों के सामने लाया जा सकेगा।
महाकाल लोक की तर्ज पर पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
उज्जैन पहले से ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। महाकाल लोक के विकास के बाद शहर में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली है। अब ‘बुद्ध लोक’ के जरिए उज्जैन की बौद्ध और प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को भी पर्यटन के नक्शे पर प्रमुखता से लाने की तैयारी है। इससे शहर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को धार्मिक स्थलों के साथ ऐतिहासिक धरोहर देखने का भी अवसर मिलेगा।
उज्जैन का इतिहास बौद्ध परंपरा से भी जुड़ा
उज्जैन प्राचीन भारत के प्रमुख नगरों में शामिल रहा है। इसका संबंध व्यापार, संस्कृति, धर्म और शिक्षा की विभिन्न परंपराओं से रहा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में मिले प्राचीन अवशेष यहां की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत की ओर संकेत करते हैं। प्रस्तावित ‘बुद्ध लोक’ के जरिए इसी विरासत को संरक्षित करने और लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा
‘बुद्ध लोक’ के विकसित होने से उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के साथ हेरिटेज और बौद्ध पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, गाइड और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को फायदा मिल सकता है। वहीं, प्राचीन स्तूप और उससे जुड़े अवशेषों के संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उज्जैन की ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी।
उत्खनन के बाद तस्वीर होगी और साफ
2200 साल पुराने स्तूप के वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन के बाद ही इस स्थल से जुड़े इतिहास और यहां मौजूद पुरातात्विक महत्व की विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी। उत्खनन से मिलने वाले अवशेष उज्जैन के प्राचीन इतिहास और बौद्ध परंपरा के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं। महाकाल लोक के बाद ‘बुद्ध लोक’ की योजना उज्जैन को धार्मिक पर्यटन के साथ ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।