जयपुर। बच्चों की सेहत, शिक्षा और समग्र विकास को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने राज्यभर के स्कूलों में जंक फूड की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। यह रोक स्कूल कैंटीन के साथ-साथ स्कूल गेट के 50 मीटर के दायरे में भी लागू होगी। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की अध्यक्षता वाली पीठ ने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ बढ़ते स्क्रीन टाइम और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि बच्चों के लिए स्कूल का वातावरण स्वस्थ, सुरक्षित और सीखने के अनुकूल होना चाहिए।
स्कूल कैंटीन में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक जैसे जंक फूड पर रोक
कोर्ट ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि हाई फैट, हाई शुगर और हाई साल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री को प्रभावी रूप से रोका जाए। इसके दायरे में कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस फैट वाले बेकरी उत्पाद और अन्य जंक फूड शामिल हैं। सिर्फ स्कूल कैंपस ही नहीं, बल्कि स्कूल गेट से 50 मीटर की दूरी तक भी ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक के निर्देश दिए गए हैं।
हर महीने होगी स्कूलों की औचक जांच
कोर्ट ने आदेश के पालन की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी है। जिला मजिस्ट्रेट और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को हर महीने औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्कूलों के अंदर या आसपास प्रतिबंधित जंक फूड की बिक्री न हो। इससे स्कूलों के आसपास चिप्स, कार्बोनेटेड ड्रिंक और अन्य HFSS उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों पर भी निगरानी बढ़ सकती है।
2020 की गाइडलाइन का पालन नहीं होने पर कोर्ट नाराज
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि Food Safety and Standards (Safe Food and Balanced Diets for Children in School) Regulations, 2020 के तहत बच्चों के लिए सुरक्षित और संतुलित भोजन को लेकर दिशानिर्देश पहले से मौजूद हैं, लेकिन वर्षों बाद भी उनका प्रभावी पालन नहीं हो पाया है। इसी वजह से कोर्ट ने स्कूलों में खाद्य सुरक्षा और पोषण व्यवस्था को लेकर निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
चार सप्ताह में बनानी होगी Food Safety and Nutrition Committee
कोर्ट ने प्रत्येक स्कूल को चार सप्ताह के भीतर School Food Safety and Nutrition Committee गठित करने का निर्देश दिया है। यह समिति स्कूल में बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता तथा पोषण संबंधी पहलुओं पर नजर रखने में मदद करेगी। इस व्यवस्था से स्कूलों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर निगरानी की जिम्मेदारी भी तय होगी।
कैंटीन में लगाना होगा Menu Board
स्कूल कैंटीन में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की जानकारी भी छात्रों को स्पष्ट रूप से देनी होगी। इसके लिए Menu Board लगाने का निर्देश दिया गया है।
इस बोर्ड पर खाद्य पदार्थ की:
- कैलोरी
- सामग्री
- पोषण संबंधी जानकारी
स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। इससे बच्चों और अभिभावकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि स्कूल कैंटीन में उपलब्ध भोजन में क्या-क्या शामिल है।
मिड-डे मील में संतुलित आहार पर जोर
कोर्ट ने स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील/स्कूल भोजन में संतुलित आहार के मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। अदालत का फोकस केवल जंक फूड को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराने पर भी है।
बच्चों के बढ़ते Screen Time पर भी चिंता
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर भी चिंता व्यक्त की। अदालत ने शिक्षा में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को पूरी तरह नकारा नहीं, लेकिन कहा कि तकनीकी उपकरण बुनियादी सीखने की प्रक्रिया का विकल्प नहीं बनने चाहिए। कोर्ट ने बच्चों के लिए हैंडराइटिंग, किताबें पढ़ने, नोट्स लिखने और लिखित परीक्षाओं जैसी पारंपरिक सीखने की प्रक्रियाओं के महत्व पर भी जोर दिया।
AI का इस्तेमाल हो, लेकिन बेसिक लर्निंग प्रभावित न हो
अदालत ने शिक्षा व्यवस्था में टेक्नोलॉजी और AI के उपयोग को समय की जरूरत माना, लेकिन इसके संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया। यानी डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाए, लेकिन इससे पढ़ने, लिखने, हाथ से नोट्स बनाने और लिखित अभ्यास जैसी बुनियादी शैक्षणिक आदतें खत्म नहीं होनी चाहिए।
ग्रामीण सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर भी निर्देश
कोर्ट ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इनमें खाली पड़े शिक्षकीय पदों को भरना, स्मार्ट क्लासरूम विकसित करना और डिजिटल सुविधाएं बढ़ाना शामिल है।
स्कूलों में:
- खाली शिक्षकीय पद भरने
- स्मार्ट क्लासरूम उपलब्ध कराने
- कंप्यूटर की सुविधा बढ़ाने
- इंटरनेट कनेक्टिविटी सुधारने
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराने
- पर्याप्त और स्वच्छ टॉयलेट उपलब्ध कराने
- पीने के पानी की व्यवस्था बेहतर करने
- खेल सुविधाएं विकसित करने
- पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
8 सप्ताह में जिला कलेक्टरों को देनी होगी रिपोर्ट
कोर्ट ने इन निर्देशों के पालन की निगरानी के लिए सभी जिला कलेक्टरों को आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। रिपोर्ट में स्कूलों में आदेश के अनुपालन और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की जानकारी दी जानी होगी। इस आदेश से राजस्थान के स्कूलों में बच्चों के भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासनिक निगरानी बढ़ने की उम्मीद है।
Rajasthan School Junk Food Ban: क्या-क्या बदलेगा?
- स्कूल कैंटीन: HFSS और अन्य जंक फूड की बिक्री पर रोक।
- स्कूल गेट: 50 मीटर के दायरे में भी ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक।
- निरीक्षण: जिला मजिस्ट्रेट और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मासिक जांच करेंगे।
- फूड कमेटी: चार सप्ताह में School Food Safety and Nutrition Committee बनेगी।
- Menu Board: कैंटीन में कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी।
- स्कूल सुविधाएं: शिक्षकों, कंप्यूटर, इंटरनेट, स्वास्थ्य, टॉयलेट, पानी और खेल सुविधाओं में सुधार पर जोर।