भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को फिलहाल स्वैच्छिक कर दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से करीब तीन महीने पहले जारी आदेश के तहत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता में अस्थायी राहत दी गई है। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक लागू रहेगी। इस दौरान शिक्षक अपनी इच्छा के अनुसार टीईटी परीक्षा दे सकते हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दोबारा याचिका दायर कर प्रदेश के शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने की मांग की है।
शिक्षकों को छूट देने के पक्ष में सरकार
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अपनी चयन व्यवस्था रही है। इसी आधार पर सरकार का तर्क है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से छूट मिलनी चाहिए। इसी मांग को लेकर विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दोबारा याचिका दाखिल की गई है। अदालत का अंतिम निर्णय आने तक शिक्षकों के लिए टीईटी को वैकल्पिक रखने का फैसला किया गया है।
70 हजार से ज्यादा शिक्षकों पर असर
इस मामले का असर प्रदेश के 70 हजार से अधिक शिक्षकों पर पड़ सकता है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2005 से 2009 के बीच व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की चयन परीक्षा के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। वर्तमान में ये शिक्षक प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यदि राज्य सरकार के पक्ष में आता है, तो इन शिक्षकों को टीईटी परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, फैसला विपरीत आने पर टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा फिर महत्वपूर्ण हो जाएगा।
लोक शिक्षण संचालनालय ने रखा सरकार का पक्ष
लोक शिक्षण संचालनालय के अभिषेक सिंह ने कहा कि शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दोबारा याचिका दायर की गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अपनी चयन व्यवस्था थी। ऐसे में सरकार का मानना है कि इन शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट मिलनी चाहिए। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।