भोपाल। मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल में बढ़ते प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। नदियों में बिना उपचार के सीवेज पहुंचने के मामले में NGT ने मध्यप्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए मुख्य सचिव को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
352 नगर निकायों में STP नहीं
NGT के आदेश के मुताबिक मध्यप्रदेश के 352 नगर निकायों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) उपलब्ध नहीं हैं। इन निकायों से निकलने वाला गंदा पानी बिना पर्याप्त उपचार के सीधे नदियों में पहुंच रहा है। ट्रिब्यूनल ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से सवाल किया है कि इतने बड़े स्तर पर नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए अब तक क्या ठोस और प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
रोजाना 637 MLD सीवेज नदियों में पहुंचने का दावा
NGT के अनुसार नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल नदी में प्रतिदिन करीब 637 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) सीवेज पहुंच रहा है। लगातार untreated sewage के नदी में मिलने से जल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है। नदियों में सीवेज का यह प्रवाह पर्यावरण के साथ-साथ जलीय पारिस्थितिकी के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
जलीय जीवन और लोगों के स्वास्थ्य पर चिंता
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि दूषित पानी से जलीय जीवों और नदी के पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा नदी के आसपास रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है।
मुख्य सचिव की रिपोर्ट पर टिकी नजरें
NGT ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अब सरकार की रिपोर्ट में प्रदूषण की स्थिति, सीवेज प्रबंधन और नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद NGT आगे क्या कार्रवाई करता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।