भोपाल। मध्यप्रदेश में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में नई सड़कों के निर्माण और मौजूदा मार्गों के विकास को गति देने के लिए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) को 4,600 करोड़ रुपये के ऋण की व्यवस्था की जाएगी। इस ऋण के लिए राज्य सरकार प्रत्याभूति यानी गारंटी देगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, यह राशि नाबार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस (NIDA) के माध्यम से प्राप्त होगी। प्रस्ताव के तहत प्रदेश में 12 महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण से अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क केवल आवागमन को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि इससे कृषि, उद्योग, व्यापार, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। सड़क परियोजनाओं के निर्माण के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप, सर्विस सेंटर और अन्य स्थानीय व्यवसायों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
12 सड़कों के निर्माण के लिए 4,600 करोड़ रुपये की ऋण व्यवस्था
राज्य सरकार की योजना के अनुसार मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को नाबार्ड की इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस (NIDA) योजना के तहत 4,600 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस ऋण के लिए राज्य शासन की ओर से गारंटी दी जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल प्रदेश में प्रस्तावित 12 सड़क परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जाएगा। इन मार्गों के निर्माण से प्रदेश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सड़क नेटवर्क को प्रदेश के आर्थिक विकास से जोड़ते हुए कहा है कि मजबूत अधोसंरचना से शहरों, कस्बों, गांवों, औद्योगिक क्षेत्रों और बाजारों के बीच संपर्क अधिक प्रभावी होगा।
22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व MPRDC को सौंपने की तैयारी
सड़क विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के साथ ही सरकार ने सड़क परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया है। प्रदेश की 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व नाममात्र मूल्य पर मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) को हस्तांतरित किया जाएगा। इस हस्तांतरण के बदले निगम का संचालक मंडल राज्य सरकार के पक्ष में अपनी अंश पूंजी यानी शेयर जारी करेगा। इस व्यवस्था के पीछे उद्देश्य यह है कि प्रमुख सड़क मार्गों से होने वाली आय को सड़क विकास से जुड़े कार्यों में प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सके। सरकार के मुताबिक, इससे निगम की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने और भविष्य की सड़क परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।
टोल से होने वाली आय से चुकाया जाएगा ऋण
प्रस्तावित व्यवस्था में सड़क परियोजनाओं पर लिए जाने वाले ऋण की अदायगी के लिए संबंधित मार्गों से मिलने वाले टोल संग्रहण और अन्य आय के स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी सड़क परियोजनाओं के निर्माण के बाद इन मार्गों से प्राप्त होने वाली राशि को ऋण की किस्त और ब्याज के भुगतान से जोड़ा जाएगा। इससे राज्य के बजट पर सीधे अतिरिक्त वित्तीय दबाव कम रखने की कोशिश की गई है। इसके लिए मध्यप्रदेश राजमार्ग निधि अधिनियम, 2012 में संशोधन का प्रावधान भी रखा गया है। संशोधन के बाद संबंधित मार्गों से टोल और अन्य स्रोतों से मिलने वाली राशि को सीधे निगम की आय के रूप में माना जाएगा।
परियोजनाओं में बदलाव का अधिकार MPRDC को
सरकार ने स्वीकृत ऋण सीमा के भीतर सड़क परियोजनाओं के चयन और आवश्यक बदलावों के लिए निगम के संचालक मंडल को अधिकार देने की व्यवस्था की है। इसके तहत परिस्थितियों और आवश्यकता के अनुसार प्रस्तावित मार्गों में परिवर्तन किया जा सकेगा या नए मार्गों को परियोजना में शामिल किया जा सकेगा। इससे सड़क निर्माण से जुड़े फैसलों में अपेक्षाकृत अधिक लचीलापन रहने की संभावना है।
जरूरत के हिसाब से ही निकाली जाएगी ऋण की राशि
परियोजना के तहत पूरी ऋण राशि एक साथ निकालने के बजाय 'जस्ट इन टाइम' (JIT) सिद्धांत अपनाया जाएगा। इसका मतलब है कि जिस समय परियोजना के लिए वास्तव में धन की आवश्यकता होगी, उसी के अनुरूप राशि का आहरण किया जाएगा। इससे बिना जरूरत बड़ी राशि को पहले से निकालकर रखने की स्थिति से बचा जा सकेगा और वित्तीय प्रबंधन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।
सिवनी-बालाघाट फोरलेन सड़क परियोजना को मिलेगी बड़ी रफ्तार
इन सड़क परियोजनाओं में सिवनी-बालाघाट मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। करीब 91.64 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को पेव्ड शोल्डर के साथ 4-लेन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, इस सड़क के निर्माण और उससे जुड़े अन्य आवश्यक कार्यों पर कुल 3,960 करोड़ 09 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह परियोजना केवल दो जिलों के बीच आवागमन को बेहतर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव आसपास के वन क्षेत्रों, खनिज गतिविधियों, पर्यटन स्थलों, कृषि क्षेत्र और व्यापारिक नेटवर्क पर भी पड़ने की संभावना है।
HAM मॉडल के आधार पर होगा सड़क निर्माण
सिवनी-बालाघाट मार्ग का निर्माण हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के आधार पर किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत परियोजना की निर्माण लागत का एक हिस्सा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि शेष राशि का भुगतान संचालन अवधि के दौरान निर्धारित एन्यूटी के रूप में किया जाएगा। परियोजना निर्माण लागत की 40 प्रतिशत राशि 704 करोड़ 38 लाख रुपये राज्य बजट के माध्यम से खर्च की जाएगी। इसके बाद शेष 60 प्रतिशत राशि 2,253 करोड़ 39 लाख रुपये संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छमाही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट से व्यय की जाएगी। इस मॉडल के जरिए सड़क का निर्माण और उसके बाद लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था एक निर्धारित वित्तीय ढांचे के तहत आगे बढ़ाई जाएगी।
सिवनी-बालाघाट मार्ग क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
सिवनी-बालाघाट सड़क मध्यप्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह राज्य राजमार्ग-72 के रूप में सिवनी जिला मुख्यालय को बालाघाट से जोड़ता है। बालाघाट वन और खनिज संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जबकि सिवनी कृषि और पर्यटन गतिविधियों के लिए जाना जाता है। दोनों क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने से लोगों के साथ-साथ माल और पर्यटकों की आवाजाही को भी लाभ मिल सकता है। यह मार्ग कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने का काम करता है। इसके जरिए राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (नागपुर-लखनादौन), राष्ट्रीय राजमार्ग-543 (गोंदिया-मंडला) और एनएच-543 के बालाघाट-भंडारा हिस्से से संपर्क उपलब्ध होता है। इस वजह से यह सड़क स्थानीय कनेक्टिविटी के साथ व्यापक क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क का भी हिस्सा बन सकती है।
खनिज और वन क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी
सिवनी-बालाघाट मार्ग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह क्षेत्र कई महत्वपूर्ण खनिज एवं वन संसाधनों से जुड़ा हुआ है। इस सड़क के माध्यम से मलाजखंड तांबा परियोजना और भरवेली मैंगनीज माइंस जैसे महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों तक संपर्क उपलब्ध होता है। बेहतर सड़क बनने से इन क्षेत्रों से जुड़े परिवहन और लॉजिस्टिक्स को लाभ मिल सकता है। खनिज एवं अन्य औद्योगिक सामग्री के आवागमन में समय और लागत घटने से संबंधित आर्थिक गतिविधियों को भी समर्थन मिलने की संभावना है।
कान्हा और पेंच पर्यटन क्षेत्र को भी फायदा
सिवनी-बालाघाट मार्ग का सीधा संबंध मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों से भी है। यह क्षेत्र कान्हा टाइगर रिजर्व और पेंच टाइगर रिजर्व जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच के लिहाज से अहम है। सड़क की गुणवत्ता बेहतर होने और चार लेन कनेक्टिविटी विकसित होने से पर्यटकों की आवाजाही आसान हो सकती है। इससे केवल पर्यटन स्थलों को ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को भी आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन, छोटे व्यवसाय और स्थानीय बाजारों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
करीब 8 से 10 लाख लोगों को बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद
प्रस्तावित सड़क परियोजना से लगभग 8 से 10 लाख की आबादी को बेहतर सड़क संपर्क मिलने का अनुमान है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए जिला मुख्यालय, मंडियां, बाजार, अस्पताल और शिक्षण संस्थानों तक पहुंच आसान हो सकती है। वहीं शहरी क्षेत्रों के लिए भी आसपास के ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों तक आवागमन अधिक सुगम होने की संभावना है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने का सबसे बड़ा असर उन इलाकों पर पड़ सकता है जहां वर्तमान में लंबी दूरी तय करने में अधिक समय लगता है।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?
सड़क निर्माण को सरकार केवल परिवहन परियोजना के रूप में नहीं देख रही है। बेहतर सड़क नेटवर्क को प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का आधार बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जब किसी क्षेत्र में सड़क संपर्क बेहतर होता है तो वहां माल की आवाजाही, लोगों की यात्रा और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना रहती है।
माल ढुलाई का समय और खर्च हो सकता है कम
अच्छी सड़कें शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को बाजारों तथा अन्य राज्यों के परिवहन नेटवर्क से जोड़ने में मदद करती हैं। सड़क मार्ग बेहतर होने से माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम हो सकता है। इसके साथ ही परिवहन लागत में कमी आने की संभावना रहती है। इसका लाभ व्यापार और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर ऐसे उद्योग जिनकी लागत में परिवहन का हिस्सा अधिक होता है, उनके लिए बेहतर सड़क नेटवर्क महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
नए निवेश के लिए बन सकता है बेहतर माहौल
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। जब औद्योगिक क्षेत्र प्रमुख शहरों, बाजारों और परिवहन नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़े होते हैं, तो कारोबार के लिए लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर हो सकती है। मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी के विस्तार से नए उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित होने की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र को भी मिलेगा सड़क विकास का सीधा लाभ
मध्यप्रदेश की बड़ी आबादी कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। ऐसे में मजबूत सड़क नेटवर्क का लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है। ग्रामीण इलाकों से कृषि उपज को मंडियों, बड़े बाजारों, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाना आसान होगा। विशेष रूप से फल, सब्जियां, दूध और अन्य जल्दी खराब होने वाली उपज के मामले में समय पर परिवहन बेहद महत्वपूर्ण होता है। बेहतर सड़क संपर्क से ऐसी उपज को कम समय में बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है और खराब होने से होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है।
किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने की संभावना
सड़क संपर्क बढ़ने से किसानों के पास अपनी उपज को अलग-अलग बाजारों तक ले जाने के विकल्प बढ़ सकते हैं। यदि किसान आसपास की एक ही मंडी पर निर्भर रहने के बजाय अन्य बाजारों तक आसानी से पहुंच सकें, तो उन्हें अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके साथ ही सड़क नेटवर्क मजबूत होने से कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता को भी बढ़ावा मिल सकता है।
उद्योग और व्यापार के विस्तार को मिलेगी नई दिशा
नई और बेहतर सड़कें औद्योगिक क्षेत्रों को प्रमुख बाजारों और बड़े परिवहन नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों की बाजार तक पहुंच दोनों ही सड़क कनेक्टिविटी पर काफी हद तक निर्भर करते हैं। बेहतर मार्ग उपलब्ध होने से इन गतिविधियों में समय की बचत हो सकती है। सड़क के आसपास वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स सेंटर, दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इससे मध्यप्रदेश को एक मजबूत लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों को आधार मिल सकता है।
गांवों और दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद
सड़क अधोसंरचना का महत्व केवल बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बेहतर सड़क संपर्क विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। सड़कें मजबूत होने से गांवों को जिला मुख्यालयों, मंडियों, अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों और बाजारों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा। इससे ग्रामीण आबादी के लिए आर्थिक अवसरों तक पहुंच आसान हो सकती है और दूरस्थ इलाकों को प्रदेश की व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
पर्यटन को भी मिलेगा नया बूस्ट
मध्यप्रदेश में धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक और वन्यजीव पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। ऐसे में पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी पर्यटकों की आवाजाही को आसान बना सकती है। कान्हा और पेंच जैसे प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्रों के अलावा प्रदेश के अन्य स्थानीय और ग्रामीण पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होने से पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन, दुकानों और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। इसका फायदा स्थानीय कारोबारियों और छोटे उद्यमियों को मिल सकता है।
सड़क निर्माण से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
बड़ी सड़क परियोजनाओं का प्रभाव निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रहता। निर्माण के दौरान श्रमिकों, मशीनरी, निर्माण सामग्री, परिवहन और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ती है। इससे परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। सड़क बनने के बाद भी उसके आसपास आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावना रहती है। नए ढाबे, होटल, पेट्रोल पंप, सर्विस सेंटर, दुकानें और अन्य छोटे व्यवसाय शुरू हो सकते हैं। इससे स्थानीय लोगों के लिए आय के नए स्रोत विकसित होने की उम्मीद है।
ADB-7 के तहत भी जारी हैं सड़क परियोजनाएं
मध्यप्रदेश में सड़क अधोसंरचना के विस्तार का काम केवल इस नई वित्तीय व्यवस्था तक सीमित नहीं है। वर्तमान में ADB-7 योजना के तहत 1,149 किलोमीटर राज्य राजमार्ग निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा Hybrid Annuity Model (HAM) के तहत भी विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। सरकार की कोशिश है कि नई परियोजनाओं के साथ मौजूदा सड़कों का उन्नयन भी जारी रहे, ताकि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के बीच मजबूत और भरोसेमंद सड़क नेटवर्क विकसित किया जा सके।
आने वाले समय में क्या होगा असर?
यदि प्रस्तावित परियोजनाएं निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो इसका प्रभाव केवल सड़क परिवहन तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी से-
शहरों और गांवों के बीच आवागमन आसान हो सकता है।
कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में समय कम हो सकता है।
उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है।
नए स्थानीय व्यवसाय विकसित हो सकते हैं।
निर्माण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
दूरस्थ क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
इस तरह सड़क विकास को प्रदेश की व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रगति से जोड़कर देखा जा रहा है।