काठमांडू/पटना। चीन के तिब्बत क्षेत्र से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाकों में कई घर, बाजार और अन्य संपत्तियां बाढ़ की चपेट में आ गईं। तेज बहाव में वाहन और सामान बह गए, जबकि एक पुल भी टूट गया। रसुवा में एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के भी बाढ़ में बहने की जानकारी सामने आई है। अब तक 7 लोगों की मौत की खबर है, जबकि टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान में 25 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू के लिए 14 हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं।
बिहार में भी हाई अलर्ट
नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
बाढ़ में बह गया हेलिपैड, हेलिकॉप्टर को लौटना पड़ा
रसुवा के टिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजा गया एक हेलिकॉप्टर सुरक्षित लैंडिंग नहीं कर सका और काठमांडू लौट गया। बाढ़ के पानी में स्थानीय हेलिपैड बह जाने के कारण पायलट को उतरने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिली। पायलट के मुताबिक, ऊपर से देखने पर टिमुरे गांव का बड़ा हिस्सा नजर नहीं आ रहा था। उन्होंने बताया कि त्रिशूली नदी का पानी बेहद तेजी से बढ़ा।
ग्लेशियल झील फटने की आशंका
रसुवा में पिछले 24 घंटे के दौरान 7 मिमी से अधिक बारिश नहीं हुई, ऐसे में अधिकारियों को आशंका है कि बाढ़ की वजह स्थानीय बारिश नहीं बल्कि तिब्बत में किसी ग्लेशियल झील के फटने से आई अचानक बाढ़ हो सकती है। इसे Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) कहा जाता है। ICIMOD-UNDP की 2020 की एक स्टडी के अनुसार भोटेकोशी बेसिन में करीब 122 ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कौन-सी झील फटी है। सैटेलाइट इमेज और तकनीकी जांच के जरिए बाढ़ के वास्तविक स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
नेपाली सेना और सुरक्षा बलों की तैनाती
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। अन्य जिलों से भी अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को बुलाया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ भेजे जा रहे हैं। नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
त्रिशूली नदी को लेकर भी खतरा
भोटेकोशी में जलस्तर बढ़ने के बाद आगे त्रिशूली नदी में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन में नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। लोगों से नदी में जाने, मछली पकड़ने और नदी किनारे काम करने से बचने की अपील की गई है।
बिहार तक पहुंच सकता है बाढ़ का असर
भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है और आगे जाकर सुनकोशी नदी में मिलती है। सुनकोशी आगे चलकर सप्तकोशी (कोसी) नदी का हिस्सा बनती है, जो भारत में बिहार की ओर बहती है। इसी वजह से नेपाल में अचानक आई बाढ़ का असर बिहार में भी पड़ने की आशंका है। प्रशासन ने संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ा दी है।
पिछले साल भी आई थी भोटेकोशी में भीषण बाढ़
भोटेकोशी नदी में पिछले साल भी बाढ़ आई थी, जिसमें नेपाल को भारी नुकसान हुआ था। उस घटना में 9 लोगों की मौत हुई थी और 24 लोग लापता हो गए थे। नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बाढ़ में बह गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सड़क संपर्क और व्यापारिक गतिविधियां कई महीनों तक प्रभावित रही थीं।