रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल होने जा रही है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में जल्द ही कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। ये बसें प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत संचालित की जाएंगी। ई-बस सेवा शुरू होने से इन चारों शहरों में लोगों को सार्वजनिक परिवहन का एक और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। खास बात यह है कि बसों के रूट तय करते समय महिलाओं की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा। महिलाओं के लिए स्कूल, अस्पताल और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ने वाले विशेष रूट तैयार किए जाने की योजना है। ई-बसों के संचालन से पहले बस रूट, बस स्टॉप, डिपो, चार्जिंग सेंटर और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी जरूरी व्यवस्थाओं को तैयार किया जाएगा।
चार नगर निगमों के लिए 240 ई-बसों को मंजूरी
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के चार नगर निगमों के लिए कुल 240 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी मिली है। इसमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा शामिल हैं। अब संबंधित विभाग इन शहरों में बस संचालन की पूरी व्यवस्था तैयार करने में जुटा है। अधिकारियों की बैठक में बसों के संभावित रूट, स्टॉप, डिपो और चार्जिंग व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। बसों का संचालन शुरू होने से पहले यह तय किया जाएगा कि किस शहर में किन मार्गों पर अधिक जरूरत है और किन इलाकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना जरूरी है।
महिलाओं के लिए बनाए जाएंगे विशेष रूट
ई-बस सेवा की योजना में महिलाओं की सुविधा और सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसके तहत ऐसे रूट तैयार किए जाएंगे, जो महिलाओं के लिए जरूरी और अधिक आवाजाही वाले स्थानों को आपस में जोड़ सकें। इन रूट में स्कूल, अस्पताल और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों को शामिल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को शहर के प्रमुख हिस्सों तक आसानी से और सुविधाजनक तरीके से पहुंचने का विकल्प उपलब्ध कराना है। हालांकि, रूट की अंतिम सूची यात्रियों की जरूरत, संबंधित क्षेत्र की आबादी और रोजाना होने वाली आवाजाही के आधार पर तय की जाएगी।
बस स्टॉप से लेकर डिपो और चार्जिंग सेंटर तक होगी व्यवस्था
ई-बसें चलाने के लिए सिर्फ बसों की व्यवस्था करना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए शहरों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा। योजना के तहत बस स्टॉप, बस डिपो और इलेक्ट्रिक चार्जिंग सेंटर तैयार किए जाएंगे। बसों को नियमित रूप से चार्ज करने के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा बसों की आवाजाही और संचालन पर निगरानी रखने के लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी विकसित किया जाएगा। इससे बसों की लोकेशन, संचालन और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी में मदद मिलेगी।
यात्रियों की जरूरत के हिसाब से तय होंगे रूट
चारों शहरों में ई-बसों के रूट एक जैसे नहीं होंगे। स्थानीय जरूरतों को देखते हुए अलग-अलग मार्गों का चयन किया जाएगा। रूट तय करते समय यह देखा जाएगा कि किन इलाकों में यात्रियों की संख्या अधिक है, कहां सार्वजनिक परिवहन की जरूरत ज्यादा है और कौन से महत्वपूर्ण स्थान अभी बेहतर बस कनेक्टिविटी से जुड़े नहीं हैं। इससे कोशिश रहेगी कि ई-बस सेवा केवल मुख्य शहर तक सीमित न रहे, बल्कि यात्रियों की वास्तविक जरूरत वाले क्षेत्रों तक भी पहुंचे।
छात्रों और रोजाना सफर करने वालों को भी फायदा
ई-बस सेवा शुरू होने के बाद इसका लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगा। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और रोजाना काम के लिए आने-जाने वाले यात्रियों को भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बाजार और दूसरे प्रमुख स्थानों को जोड़ने वाले रूट तैयार होने से शहर के भीतर आवागमन आसान हो सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने में भी मदद मिलेगी।
चार शहरों में सार्वजनिक परिवहन को मिलेगा नया विकल्प
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा प्रदेश के प्रमुख शहरी केंद्र हैं। इन शहरों में आबादी और यातायात का दबाव बढ़ने के साथ सार्वजनिक परिवहन की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 240 ई-बसों का संचालन लोगों को निजी वाहनों के अलावा सार्वजनिक परिवहन का एक और विकल्प उपलब्ध करा सकता है। सरकार की योजना है कि रूट और इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारियां पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से सेवा को शुरू किया जाए।