भोपाल। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज घोटाला मामले में अब 130 नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच होगी। इनमें ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेज भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच से पहले नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों की परीक्षाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, सीबीआई जांच में जिन कॉलेजों को ‘ग्रीन चेक’ मिलेगा, वहां पढ़ने वाले छात्र अपनी परीक्षा दे सकेंगे। वहीं जिन कॉलेजों को ग्रीन चेक नहीं मिलेगा, उनके छात्रों को दूसरे संस्थानों में शिफ्ट किया जाएगा। इस फैसले से करीब 8 से 10 हजार नर्सिंग छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
‘प्रबंधन के जिम्मेदार लोगों से सवाल करें छात्र’
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन को फीस, डोनेशन या अन्य किसी मद में राशि दी है तो उन्हें संबंधित प्रबंधन के जिम्मेदार लोगों से सवाल करना चाहिए। अदालत ने छात्रों को प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कदम उठाने और हाईकोर्ट में सख्त कार्रवाई की मांग करने की बात कही है।
31 अगस्त तक हाईकोर्ट जा सकते हैं छात्र
छात्रों की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वर्ष 2021-22 में दाखिले के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक समिति गठित की गई थी। समिति की जांच में संबंधित कॉलेजों को निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप पाया गया था। छात्र पक्ष ने कहा कि इस मामले में वे 31 अगस्त से पहले हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
CBI जांच के बाद ही कॉलेजों को राहत
नर्सिंग कॉलेजों को अब सीबीआई जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा। अंडरटेकिंग देने वाले कॉलेजों को जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट से आवश्यक स्पष्टीकरण लेना होगा। जबलपुर हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीबीआई जांच के बिना नर्सिंग कॉलेजों को राहत नहीं दी जा सकती। जांच के दौरान कॉलेजों को निर्धारित श्रेणी के आधार पर आंका जाएगा और उसी के अनुसार छात्रों की परीक्षा को लेकर फैसला होगा।
छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा पर बड़ा असर
मामले में सबसे बड़ी चिंता उन हजारों छात्रों के भविष्य को लेकर है, जिन्होंने इन कॉलेजों में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई पूरी की है। ग्रीन चेक नहीं मिलने वाले कॉलेजों के छात्रों को दूसरे संस्थानों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था से उनकी पढ़ाई, परीक्षा और शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने की आशंका है। अब सीबीआई जांच में कॉलेजों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि किन संस्थानों के छात्र अपने ही कॉलेज से परीक्षा दे पाएंगे और किन छात्रों को दूसरे संस्थानों में भेजा जाएगा।