नई दिल्ली। सावन महीने की समाप्ति के साथ ही हिंदू पंचांग का एक और महत्वपूर्ण महीना शुरू होने जा रहा है। 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के साथ सावन मास का समापन होगा और इसके अगले दिन यानी 29 अगस्त 2026 से भाद्रपद महीना शुरू हो जाएगा। यह महीना 26 सितंबर 2026 तक रहेगा। भाद्रपद मास को धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कजरी तीज, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, ऋषि पंचमी, राधा अष्टमी, वामन जयंती और अनंत चतुर्दशी जैसे कई प्रमुख पर्व और व्रत पड़ेंगे। इसी महीने में दस दिवसीय गणेशोत्सव भी शुरू होगा, जिसकी शुरुआत गणेश चतुर्थी से होगी और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन होगा। ऐसे में अगस्त के आखिरी सप्ताह से लेकर सितंबर के आखिरी सप्ताह तक धार्मिक आयोजनों और व्रत-त्योहारों का सिलसिला जारी रहेगा।
29 अगस्त से शुरू होगा भाद्रपद मास
सावन पूर्णिमा के अगले दिन 29 अगस्त 2026, शनिवार से भाद्रपद मास का आरंभ होगा। पंचांग के अनुसार इस महीने में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। भाद्रपद मास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश, भगवान विष्णु, माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़े कई प्रमुख पर्व आते हैं। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और व्रत के लिहाज से यह महीना विशेष माना जाता है।
कजरी तीज से होगी त्योहारों की शुरुआत
भाद्रपद मास के शुरुआती दिनों में ही कजरी तीज का पर्व आएगा। इस साल कजरी तीज 31 अगस्त 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। कजरी तीज पर महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर इस दिन लोक परंपराओं और धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। इसके बाद भाद्रपद मास में एक के बाद एक कई प्रमुख पर्व आने लगेंगे।
हल षष्ठी पर होगी पूजा
2 सितंबर 2026, बुधवार को हल षष्ठी का व्रत रखा जाएगा। इसे बलराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान बलराम की पूजा की जाती है। ग्रामीण और कृषि परंपराओं से भी इस पर्व का संबंध माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में हल षष्ठी की पूजा और व्रत की परंपराएं अलग-अलग तरीके से निभाई जाती हैं।
4 सितंबर को मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
भाद्रपद मास के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। मंदिरों और घरों में विशेष सजावट होती है और रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना की जाती है। कई स्थानों पर जन्माष्टमी के अवसर पर झांकियां, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। कृष्ण भक्तों के लिए यह भाद्रपद महीने का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को
जन्माष्टमी के कुछ दिन बाद 7 सितंबर 2026, सोमवार को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। अजा एकादशी पर श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं।
11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या
11 सितंबर 2026, शुक्रवार को भाद्रपद अमावस्या रहेगी। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन स्नान, दान, पूजा और धार्मिक कर्मकांड किए जाते हैं। भाद्रपद अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष शुरू होगा और इसके साथ ही त्योहारों का सिलसिला और भी तेज हो जाएगा।
14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी
भाद्रपद मास की सबसे खास तारीखों में 14 सितंबर 2026, सोमवार शामिल है। इस दिन हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा और इसी दिन गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। हरतालिका तीज पर महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से व्रत और पूजा करती हैं।
हरतालिका तीज का व्रत क्यों माना जाता है कठिन?
हरतालिका तीज को कठिन व्रतों में गिना जाता है। कई परंपराओं में इस दिन निर्जला व्रत रखने की मान्यता है, यानी व्रत के दौरान अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता। मान्यता के अनुसार व्रती महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई जगह रात में जागरण, भजन और कीर्तन की परंपरा भी है। अगले दिन पूजा-अर्चना के बाद व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों में व्रत रखने का तरीका व्यक्तिगत स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होना चाहिए।
14 सितंबर से शुरू होगा 10 दिन का गणेशोत्सव
14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के दिन गणपति स्थापना के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव शुरू होगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इसी दिन श्रद्धालु गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे। इस दौरान घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति पूजा, आरती और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
15 सितंबर को ऋषि पंचमी
गणेश चतुर्थी के अगले दिन यानी 15 सितंबर 2026, मंगलवार को ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाएगा। ऋषि पंचमी हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण धार्मिक तिथियों में शामिल है। इस दिन सप्तर्षियों की पूजा करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखते हैं और धार्मिक विधि-विधान से पूजा करते हैं।
17 सितंबर को ज्येष्ठा गौरी पूजा
17 सितंबर 2026, गुरुवार को ज्येष्ठा गौरी या गौरी पूजा का पर्व मनाया जाएगा। विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित कुछ क्षेत्रों में इस पर्व की विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता है। गौरी पूजा के दौरान माता गौरी की आराधना की जाती है और घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
19 सितंबर को राधा अष्टमी
भाद्रपद मास में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा रानी से जुड़ा प्रमुख पर्व भी आता है। इस साल 19 सितंबर 2026, शनिवार को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। राधा अष्टमी पर राधा रानी की पूजा की जाती है। ब्रज क्षेत्र सहित देश के कई हिस्सों में इस दिन विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।
22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी
22 सितंबर 2026, मंगलवार को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है और भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ी मानी जाती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है।
23 सितंबर को वामन जयंती
परिवर्तिनी एकादशी के अगले दिन 23 सितंबर 2026, बुधवार को वामन जयंती मनाई जाएगी। यह भगवान विष्णु के वामन अवतार के प्राकट्य से जुड़ा पर्व है। इस अवसर पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है और मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
25 सितंबर को गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी
भाद्रपद मास के अंतिम दिनों में सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को होगा। इस दिन अनंत चतुर्दशी के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होगा। गणेश चतुर्थी पर स्थापित की गई गणपति प्रतिमाओं का इस दिन श्रद्धा के साथ विसर्जन किया जाएगा। कई शहरों में विसर्जन यात्राएं और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा, इसके बाद पितृ पक्ष
26 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा होगी। इसके साथ भाद्रपद मास का समापन माना जाएगा और इसके बाद पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। इस तरह भाद्रपद मास का अंतिम सप्ताह भी धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहेगा।
भाद्रपद मास 2026 की पूरी व्रत-त्योहार सूची
| तारीख | दिन | पर्व/व्रत |
|---|---|---|
| 29 अगस्त 2026 | शनिवार | भाद्रपद मास प्रारंभ |
| 31 अगस्त 2026 | सोमवार | कजरी तीज |
| 2 सितंबर 2026 | बुधवार | हल षष्ठी |
| 4 सितंबर 2026 | शुक्रवार | श्रीकृष्ण जन्माष्टमी |
| 7 सितंबर 2026 | सोमवार | अजा एकादशी |
| 11 सितंबर 2026 | शुक्रवार | भाद्रपद अमावस्या |
| 14 सितंबर 2026 | सोमवार | हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव प्रारंभ |
| 15 सितंबर 2026 | मंगलवार | ऋषि पंचमी |
| 17 सितंबर 2026 | गुरुवार | ज्येष्ठा गौरी/गौरी पूजा |
| 19 सितंबर 2026 | शनिवार | राधा अष्टमी |
| 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | परिवर्तिनी एकादशी |
| 23 सितंबर 2026 | बुधवार | वामन जयंती |
| 25 सितंबर 2026 | शुक्रवार | अनंत चतुर्दशी, गणेश विसर्जन |
| 26 सितंबर 2026 | शनिवार | भाद्रपद पूर्णिमा, पितृ पक्ष प्रारंभ |