Sawan Purnima 2026: सावन का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है और इसके साथ ही सावन पूर्णिमा, रक्षाबंधन और श्रावणी स्नान को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है कि व्रत की पूर्णिमा 27 अगस्त को होगी या 28 अगस्त को। पंचांग के अनुसार दोनों दिनों का अलग-अलग धार्मिक महत्व है। इस वर्ष व्रत की पूर्णिमा 27 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी, जबकि स्नान-दान की पूर्णिमा 28 अगस्त को होगी। इसी दिन रक्षाबंधन और श्रावणी स्नान भी किया जाएगा। वहीं 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव रहेगा, जो शाम तक समाप्त हो जाएगा। ऐसे में आइए जानते हैं सावन पूर्णिमा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण तिथियां और मान्यताएं।
27 अगस्त को होगी व्रत की पूर्णिमा
पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 8:23 बजे शुरू होगी। व्रत की पूर्णिमा का निर्धारण शाम के समय पूर्णिमा तिथि रहने के आधार पर किया जाता है। यही वजह है कि इस साल व्रत रखने वाले श्रद्धालु 27 अगस्त को पूर्णिमा व्रत रखेंगे। पूर्णिमा व्रत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार व्रत और पूजा-अर्चना करते हैं।
28 अगस्त को स्नान-दान की पूर्णिमा
वहीं स्नान और दान के लिए पूर्णिमा की तिथि 28 अगस्त 2026 को मानी जाएगी। पंचांग के मुताबिक पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह 9:09 बजे तक रहेगी। चूंकि स्नान-दान की पूर्णिमा सूर्योदय से जुड़ी होती है, इसलिए इसका पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इसी दिन पवित्र नदियों या तीर्थस्थलों में स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा है। जबलपुर के लोकविजय पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन भी 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।
27 अगस्त को रहेगी भद्रा, 28 को भद्राहीन राखी
रक्षाबंधन के दिन भद्रा को लेकर भी लोगों के मन में सवाल रहता है। पंचांग के अनुसार इस बार 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव रहेगा, लेकिन यह उसी दिन शाम तक समाप्त हो जाएगी। इसका मतलब यह है कि 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में राखी बांधने को लेकर भद्रा संबंधी बाधा नहीं रहेगी। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
श्रावणी स्नान का भी विशेष महत्व
सावन पूर्णिमा के अगले दिन होने वाला श्रावणी पर्व विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में इसे आत्मशुद्धि और धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़कर देखा गया है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ श्रावणी स्नान भी किया जाएगा। इस अवसर पर स्नान, पूजा और धार्मिक विधियों का पालन करने की परंपरा है।
ब्राह्मणों के लिए क्यों खास है श्रावणी?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष पर्व बताए गए हैं। इसी क्रम में ब्राह्मणों के लिए श्रावणी को महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि वर्षभर में जाने-अनजाने हुए धार्मिक दोषों और अशुद्धियों से मुक्ति के लिए श्रावणी स्नान और इससे जुड़े अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावणी स्नान के बाद व्यक्ति को नई ऊर्जा और शुद्धता की अनुभूति होती है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक परंपराएं हैं।
नदी किनारे स्नान की परंपरा
श्रावणी के अवसर पर नदी या किसी पवित्र जलस्रोत में स्नान करने की परंपरा रही है। कई धार्मिक मान्यताओं में इस दिन विशेष विधि से स्नान करने और उसके बाद पूजा-पाठ व दान करने का महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि श्रावणी स्नान केवल शारीरिक शुद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धार्मिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण से भी जोड़ा गया है।
27 और 28 अगस्त को क्या-क्या होगा?
अगर तारीखों को आसान तरीके से समझें तो इस साल सावन पूर्णिमा से जुड़े प्रमुख आयोजन इस प्रकार हैं—
27 अगस्त 2026: व्रत की पूर्णिमा, भद्रा का प्रभाव
28 अगस्त 2026: स्नान-दान की पूर्णिमा
28 अगस्त 2026: रक्षाबंधन
28 अगस्त 2026: श्रावणी स्नान
27 अगस्त की भद्रा: शाम तक समाप्त होने की जानकारी
इस तरह 27 और 28 अगस्त दोनों ही धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेंगे, लेकिन दोनों दिन पूर्णिमा से जुड़ी अलग-अलग परंपराओं के लिए निर्धारित हैं।