नई दिल्ली: चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बिस्किट, ब्रेड और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की अतिरिक्त समय देने की मांग को खारिज कर दिया है। सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे 31 अगस्त तक निर्धारित सीमा से ज्यादा रखा गया चीनी का स्टॉक बाजार में बेच दें। दरअसल, सरकार ने हाल ही में बड़ी मात्रा में चीनी का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए स्टॉक रखने की अवधि 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी है। नए नियम के तहत कंपनियां अपनी सामान्य जरूरत के मुताबिक अधिकतम 15 दिन का चीनी स्टॉक ही रख सकती हैं।
कंपनियों ने मांगा था अतिरिक्त समय
खाद्य सचिव के साथ हुई बैठक में कुछ बड़ी कंपनियों ने सरकार से अतिरिक्त स्टॉक बेचने के लिए और समय देने की मांग की थी। कंपनियों का तर्क था कि अगर वे मौजूदा स्टॉक तुरंत बेच देती हैं और बाद में जरूरत पड़ने पर बाजार से चीनी खरीदती हैं, तो कीमतों में तेजी आ सकती है। कंपनियों ने यह भी चिंता जताई कि चीनी की सप्लाई कम होने पर उनके लिए एक्सपोर्ट ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, सरकार ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और 31 अगस्त की समय सीमा तय रखी है।
सरकार के फैसले से चीनी की कीमत घटने की उम्मीद
ट्रेड अधिकारियों का मानना है कि अगर कंपनियां 31 अगस्त तक अतिरिक्त स्टॉक बाजार में उतार देती हैं, तो इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में कमी आ सकती है। यह कदम इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की ओर से लगाए गए उन आरोपों के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि बड़ी मात्रा में चीनी का इस्तेमाल करने वाले कुछ खरीदारों और ट्रेडर्स ने स्टॉक जमा कर रखा है। हालांकि, कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
कंपनियों का दावा- उत्पादन जरूरत के लिए रखते हैं स्टॉक
एक सूचीबद्ध बिस्किट कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी सीजनल उत्पादन जरूरतों को पूरा करने के लिए चीनी का स्टॉक रखती है, न कि दोबारा बेचने या सट्टेबाजी के लिए। अधिकारी के मुताबिक, कंपनी द्वारा खरीदी गई चीनी का इस्तेमाल बिस्किट, कैंडी और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने में किया जाता है। उनका कहना है कि अगर कंपनियां अभी अपने हेज्ड स्टॉक को बेचती हैं, तो 15 दिन बाद उत्पादन जारी रखने के लिए उन्हें फिर से बाजार में खरीदारी करनी होगी। इससे कीमतों पर दोबारा दबाव बन सकता है।
पार्ले ने सरकार के कदम को बताया सही
पार्ले के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मयंक शाह के मुताबिक, कंपनी सरकारी नियमों के अनुसार ही चीनी का स्टॉक रखती है। उन्होंने कहा कि कंपनी की चीनी की जरूरत काफी अधिक है, लेकिन मौजूदा नियमों के कारण निर्धारित सीमा से ज्यादा स्टॉक रखना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के कदम के बाद चीनी की कीमतों में कमी आई है। उनके मुताबिक, इस फैसले से सट्टेबाजी करने वालों पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।
बाजार में आ सकती है 3-4 लाख टन अतिरिक्त चीनी
चीनी उद्योग के वरिष्ठ विश्लेषक जीके सूद के अनुसार, अगर थोक खरीदार निर्धारित सीमा से ज्यादा चीनी का स्टॉक बाजार में उतारते हैं, तो बाजार में करीब 3-4 लाख टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध हो सकती है। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि अगर बड़े खरीदार स्टॉक लिमिट का पालन करते हैं तो आने वाले समय में चीनी की कीमतों पर और दबाव कम हो सकता है।
MNC और फार्मा कंपनियों के सामने सप्लाई की चुनौती
हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बहुराष्ट्रीय FMCG और फार्मा कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इन कंपनियों को कई बार मंजूरशुदा मिलों से खास ग्रेड की चीनी की जरूरत होती है। ऐसे में समय पर जरूरी गुणवत्ता और ग्रेड की चीनी उपलब्ध कराना चुनौती बन सकता है। ISMA ने आरोप लगाया था कि कुछ ट्रेडर्स और बड़े खरीदारों ने सट्टेबाजी के उद्देश्य से चीनी की खरीद बढ़ाई, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बनी। वहीं, जीके सूद ने कहा कि किसी व्यापारिक संगठन की ओर से अपने ग्राहकों पर पूरी तरह दोष डालना उचित नहीं है।
पश्चिम बंगाल में छापेमारी से व्यापारियों में हलचल
पश्चिम बंगाल में चीनी कारोबारियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद व्यापारी समुदाय में भी हलचल बढ़ गई है। सरकार के सख्त रुख और स्टॉक लिमिट लागू करने की कार्रवाई के बीच अब बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर बनी हुई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अतिरिक्त स्टॉक को बाजार में लाकर चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों में अनावश्यक तेजी पर रोक लगाना है।