प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम को गुजरात के पवित्र तीर्थस्थल सोमनाथ पहुंचेंगे और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस अवसर के लिए मंदिर नगरी को विशेष रूप से सजाया गया है और 7 से 11 जनवरी तक श्रद्धा, भक्ति और उत्सव के वातावरण में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल एक आधिकारिक दौरा नहीं, बल्कि आस्था और राष्ट्रचेतना से जुड़ा एक भावनात्मक अवसर है।
ओंकार मंत्र का दिव्य उच्चारण
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर साझा किए गए संदेश में बताया कि उन्हें शनिवार रात लगभग आठ बजे सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र के दिव्य उच्चारण में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त होगा। मंदिर परिसर में लगातार 72 घंटे तक ओंकार मंत्र का जाप किया जाएगा, जिसमें देशभर से आए सैकड़ों संत सहभागी होंगे। यह आयोजन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की निरंतरता और शक्ति का प्रतीक है।
शौर्य यात्रा : बलिदान को नमन
प्रधानमंत्री 11 जनवरी की सुबह लगभग 9:45 बजे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। यह यात्रा उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित की जा रही है, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला जाएगा, जो वीरता, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। इसके पश्चात प्रधानमंत्री मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे।
इतिहास, संघर्ष और पुनर्निर्माण का प्रतीक
यह पर्व महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में आयोजित किया जा रहा है। इतिहास गवाह है कि कई शताब्दियों तक मंदिर को नष्ट करने के प्रयास किए गए, लेकिन सोमनाथ आज भी आस्था और राष्ट्रीय गौरव का सशक्त प्रतीक बनकर खड़ा है। आज़ादी के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प सरदार वल्लभभाई पटेल ने लिया, जिसे राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना से जोड़ा जाता है।
1951 से 2026 तक : स्वाभिमान की यात्रा
सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार की ऐतिहासिक उपलब्धि वर्ष 1951 में सामने आई, जब मूल स्वरूप में पुनर्निर्मित मंदिर के द्वार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं, जिससे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
ड्रोन शो और सार्वजनिक कार्यक्रम
उत्सवों के अंतर्गत शनिवार रात एक भव्य ड्रोन शो का भी आयोजन किया जाएगा, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से इतिहास और आस्था को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री मोदी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे, जहां वे राष्ट्र, संस्कृति और स्वाभिमान से जुड़े विचार साझा करेंगे।
राष्ट्रीय चेतना का जीवंत प्रतीक सोमनाथ
सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अडिग आस्था, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री की यह यात्रा उस सतत परंपरा का स्मरण है, जो बताती है कि भारत ने हर आघात के बाद स्वयं को और अधिक सशक्त रूप में पुनः स्थापित किया है।
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