नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि “मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से प्रवर्तन निदेशालय (ED) के काम में बाधा डाली, इसे केंद्र–राज्य विवाद नहीं माना जा सकता।” इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।
चुनाव से पहले बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद
गुरुवार को होने वाले मतदान से पहले आए इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है। आई-पैक (I-PAC) कार्यालय में ED की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप को लेकर लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। इस मामले ने अब चुनावी माहौल में नया मोड़ ले लिया है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि यदि कोई मुख्यमंत्री या मंत्री व्यक्तिगत रूप से किसी जांच में जाकर बाधा उत्पन्न करता है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र–राज्य विवाद नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
पूरा मामला 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में हुई ED की छापेमारी से जुड़ा है। एजेंसी ने आई-पैक कार्यालय और उसके सह-संस्थापक के आवास पर कार्रवाई की थी। आरोप है कि उस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी वहां पहुंचे, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई और कुछ दस्तावेज व डिजिटल उपकरण हटाए जाने की बात सामने आई।
केंद्र-राज्य विवाद की दलील खारिज
राज्य सरकार ने इस मामले को केंद्र और राज्य के बीच संवैधानिक विवाद बताते हुए बचाव किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यह संवैधानिक बहस का विषय नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत भूमिका का मामला प्रतीत होता है, जिसे केंद्र-राज्य टकराव के रूप में नहीं देखा जा सकता।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि जांच के दौरान कोई शीर्ष पद पर बैठा व्यक्ति सीधे हस्तक्षेप करता है तो यह कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। सॉलिसिटर जनरल ने दावा किया कि कुछ अहम दस्तावेज भी उस समय हटाए गए थे, जिस पर अदालत ने गंभीर चिंता जताई।
पहले की कार्रवाई और ED के आरोप
इससे पहले अदालत ने राज्य पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर रोक लगा दी थी, जो ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई थी। ED का दावा है कि कोयला तस्करी से जुड़े 2,742 करोड़ रुपये के मामले की जांच के दौरान उन्हें दबाव और डराने की कोशिशों का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक माहौल फिर गरमाया
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ED का कहना है कि I-PAC से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के चलते जांच को रोका गया, जबकि राज्य सरकार के वकीलों का दावा है कि चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
चुनावी असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल चुनाव के सियासी समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकती है। अब इस मामले की आगे की सुनवाई और अदालत का अंतिम रुख राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।