नई दिल्ली: वोट चोरी के आरोपों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन का दौर तेज होता जा रहा है। गांधी जयंती से शुरू हुआ यह आंदोलन अब दिल्ली से लेकर मुंबई तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिल्ली में ‘ज्ञानेश हटाओ’ और ‘ज्ञानेश को गिरफ्तार करो’ जैसे नारे लगाए गए। वहीं, मुंबई में भी विपक्षी दलों और बड़ी संख्या में लोगों ने लोकतंत्र बचाने के नाम पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में युवाओं और छात्र संगठनों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। इस दौरान चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष मतदान की मांग जोर-शोर से उठाई गई।
दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ के नाम पर प्रदर्शन
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने ‘जंतर-मंतर 2.0’ के नाम से आंदोलन का आह्वान किया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग राजधानी की सड़कों पर जुटने लगे। प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। आइसा नेता नेहा बोरा समेत कई छात्र और राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आंदोलन के दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था भी काफी सख्त नजर आई।
जंतर-मंतर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग
प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की। जनपथ रोड से लेकर अशोक रोड तक सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। इन इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। चुनाव सदन के आसपास भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तक पहुंच गए और कई लोग बैरिकेड पर चढ़कर विरोध करने लगे। इस दौरान ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ और ‘ज्ञानेश को गिरफ्तार करो’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ भी नारेबाजी की। हालात को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई।
महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी का मुद्दा भी उठा
प्रदर्शन के दौरान शनिवार को जंतर-मंतर पर महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि महिला पत्रकारों के साथ पुलिसकर्मियों ने आपत्तिजनक व्यवहार किया। प्रदर्शनकारियों ने एसीपी विवेक भगत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। वहीं, दिल्ली पुलिस ने मामले को जांच के लिए क्राइम ब्रांच के पास भेजने की जानकारी दी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इस मुद्दे को लेकर संसद मार्ग थाने का घेराव भी किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव
रविवार को दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। कई जगह दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। प्रदर्शन में अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा वाले दलों के कार्यकर्ता और छात्र संगठन एक साथ नजर आए। ककरेाच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ आईटीबीपी और आरएएफ के जवानों को भी तैनात किया गया। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र में रहने के लिए कहती रही। हालांकि, इसके बावजूद कई जगह विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया
आइसा नेता नेहा बोरा इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही थीं। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही रोक लिया। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जबरन एक गाड़ी में बैठाकर वहां से हटा दिया। आइसा का दावा है कि जिस गाड़ी में नेहा को ले जाया गया, वह पुलिस की गाड़ी नहीं थी। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि गाड़ी में कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। बाद में रात में नेहा को नरेला इंडस्ट्रियल थाना क्षेत्र में छोड़ दिया गया। इस कार्रवाई के खिलाफ आइसा ने पुलिस पर सवाल उठाए। वहीं, आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज को भी पुलिस द्वारा प्रदर्शन स्थल से हटाकर पुलिस वैन में ले जाने की बात सामने आई।
‘जंतर-मंतर 2.0, मोदी का पतन शुरू’- नेहा
हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग बताया। नेहा ने कहा कि यह ‘जंतर-मंतर 2.0’ है और ‘मोदी का पतन शुरू’ हो गया है। उनके बयान के बाद प्रदर्शनकारियों के बीच सरकार के खिलाफ नारेबाजी और तेज हो गई। वहीं, अभिजीत दीपक ने भी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अमित शाह देश के नागरिकों के खिलाफ युद्ध जैसा माहौल बनाना चाहते हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तंज कसते हुए ‘ज्ञानू’ नाम से भी संबोधित कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया और सरकार की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए।
प्रियंका गांधी ने भी पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी के मामले को लेकर पुलिस पर सवाल उठाए। प्रियंका गांधी ने कहा कि जिस पुलिस की जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षा देने की है, उसी पुलिस की वजह से महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया। प्रियंका की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और ज्यादा चर्चा में आ गया। विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। वहीं, प्रदर्शनकारी मामले में कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में विरोध और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
मंगलवार को विपक्षी सांसद निकालेंगे मार्च
विरोध प्रदर्शन का सिलसिला अब मंगलवार को भी जारी रहने वाला है। विपक्षी सांसद संसद भवन से चुनाव सदन तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं। इस मार्च में कई बीजेपी विरोधी दलों के सांसद शामिल हो सकते हैं। इसके चलते दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त किए जाने की संभावना है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल अब संसद से लेकर सड़क तक पहुंच गए हैं। विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस के सामने भी प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की चुनौती बनी हुई है। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय के बीच इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। सरकार के सामने चुनौती है कि बिना लाठीचार्ज के प्रदर्शन को कैसे नियंत्रित किया जाए।