स्वामी विवेकानंद की 162वीं जयंती के अवसर पर स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसायटी की ओर से रविवार को पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित समारोह में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि मनुष्य की प्राथमिकता केवल सुख नहीं, बल्कि जिजीविषा और स्वस्थ रहना होना चाहिए।
शास्त्रों में भगवान को भी वैद्य माना गया है
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि शास्त्रों में भगवान को भी वैद्य माना गया है, क्योंकि उनमें वही करुणा है जो एक डॉक्टर में होनी चाहिए। सेवा ही ईश्वर की सच्ची अनुभूति है और आज समय की मांग है कि युवा पीढ़ी अधिक संख्या में सेवा भाव के लिए आगे आए।
सऊदी अरब जैसे देशों में योग का विस्तार हो रहा
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब जैसे देशों में योग का विस्तार और पश्चिमी देशों में भारतीय डॉक्टरों का नेतृत्व भारत की बौद्धिक संपदा और वसुधैव कुटुंबकम की भावना का प्रमाण है। स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी मानव सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं।
ईश्वर भी परमार्थ में ही निहित है
स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने अपने संबोधन में आगे कहा कि जीवन का अस्तित्व मूल रूप से परमार्थ सत्ता से जुड़ा है और ईश्वर भी परमार्थ में ही निहित है। इसके साथ ही उन्होंने आगे यह भी कहा कि आज मनुष्य चाहता है कि उसका शरीर संतुलित और स्वस्थ रहे, लेकिन वास्तविक वेलनेस भारत की योग और आयुर्वेद परंपरा में निहित है।
आरएसएस महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि आरएसएस और स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसायटी जैसे संगठन राष्ट्र जागरण का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। भले ही दुनिया बाहरी सुंदरता परकरोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि असली स्वास्थ्य और संतुलन भारतीय परंपराओं में ही समाहित है।
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