ब्रज की होली केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अनोखी परंपराओं और रंगीन संस्कृति के लिए मशहूर है। खासकर बरसाना और नंदगांव की लड्डू मार होली और लट्ठमार होली को देखने के लिए हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि इन परंपराओं की शुरुआत करीब 5000 वर्ष पहले हुई थी, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम और उनकी मधुर ठिठोली से जुड़ी हुई हैं।
लड्डू मार होली की परंपरा
बरसाना के श्रीजी मंदिर में मनाई जाने वाली लड्डू मार होली बेहद खास मानी जाती है। यह उत्सव लट्ठमार होली से एक दिन पहले आयोजित होता है और इसकी कथा भी काफी रोचक है।
पौराणिक मान्यता
कहा जाता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने नंदगांव से अपने एक सखा को होली का निमंत्रण लेकर बरसाना भेजा। राधा रानी के पिता ने निमंत्रण स्वीकार किया और खुशी के माहौल में राधा जी की सखियों ने उस ग्वाले पर गुलाल उड़ाया। जब उसे प्रसाद स्वरूप लड्डू दिए गए तो वह आनंद से झूम उठा। इसी खुशी में ग्वालों ने एक-दूसरे पर लड्डू फेंकने शुरू कर दिए। आज भी उसी परंपरा को निभाते हुए श्रीजी मंदिर की अटारी से भक्तों पर लड्डू बरसाए जाते हैं। श्रद्धालु इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और भक्ति गीतों के बीच इस अनोखे उत्सव का आनंद लेते हैं।
लट्ठमार होली की परंपरा
लड्डू मार होली के अगले दिन बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाती है। यह परंपरा राधा-कृष्ण की प्रेम भरी नोकझोंक का प्रतीक मानी जाती है।
शुरुआत की कथा
मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने मित्रों के साथ नंदगांव से बरसाना होली खेलने जाते थे। वहां वे राधा जी और उनकी सखियों से हंसी-मजाक करते थे। जवाब में गोपियां उन्हें प्रेमपूर्वक लाठियों से डराती और भगाती थीं।
वर्तमान स्वरूप
आज भी इस परंपरा को बड़े उत्साह के साथ निभाया जाता है। नंदगांव के पुरुष बरसाना पहुंचते हैं और वहां की महिलाएं उन पर प्रतीकात्मक रूप से लाठियां बरसाती हैं। पुरुष ढाल से खुद को बचाते हैं। खास बात यह है कि इस पूरे आयोजन में प्रेम और उल्लास का माहौल रहता है, और हर ओर ‘राधे-राधे’ की गूंज सुनाई देती है।
साल 2026 में होली कब है?
- लड्डू मार होली – 24 फरवरी 2026, बरसाना (श्रीजी मंदिर)
- लट्ठमार होली – 25 फरवरी 2026, बरसाना
- लट्ठमार होली – 26 फरवरी 2026, नंदगांव
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