नई दिल्ली - भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ ने जूनियर क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरी हैं। 17 वर्षीय अन्वय ने वीनू मांकड़ ट्रॉफी में गुजरात के खिलाफ कर्नाटक की कप्तानी करते हुए महज 100 गेंदों पर 151 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी में 20 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। अन्वय के प्रदर्शन ने कर्नाटक को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में अहम मदद दी।
100 गेंदों में 151 रन, चौकों-छक्कों की बरसात
गुजरात के खिलाफ मुकाबले में अन्वय ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने 100 गेंदों का सामना करते हुए 151 रन बनाए, जिसमें 20 चौके और तीन छक्के शामिल थे। उनकी पारी में आक्रामक शॉट्स के साथ बड़े लक्ष्य का पीछा करने का आत्मविश्वास भी दिखाई दिया। कर्नाटक की ओर से कप्तानी कर रहे अन्वय ने मुश्किल परिस्थिति में जिम्मेदारी संभाली और टीम की वापसी में अहम भूमिका निभाई। जूनियर स्तर पर इस तरह की पारी उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिहाज से महत्वपूर्ण रही।
357 रन के लक्ष्य के सामने कर्नाटक की वापसी
मुकाबले में गुजरात ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 357 रन बनाए और कर्नाटक के सामने बड़ा लक्ष्य रखा। लक्ष्य का पीछा करने उतरी कर्नाटक की शुरुआत अच्छी नहीं रही और शुरुआती विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई।
ऐसे समय में अन्वय द्रविड़ और ध्रुव कृष्ण ने पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए 204 रन की साझेदारी की। इस साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया और कर्नाटक को जीत की स्थिति में पहुंचा दिया।
अन्वय के आउट होने के बाद भी कर्नाटक के बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा जारी रखा। टीम ने पांच विकेट शेष रहते जीत हासिल कर ली। बड़े स्कोर वाले इस मुकाबले में अन्वय की पारी और ध्रुव कृष्ण के साथ उनकी साझेदारी निर्णायक साबित हुई।
दिल्ली के खिलाफ भी दिखाई थी बल्लेबाजी की चमक
गुजरात के खिलाफ शतक से आगे बढ़कर 151 रन बनाने से पहले अन्वय दिल्ली के खिलाफ भी प्रभावशाली पारी खेल चुके थे। उस मुकाबले में उन्होंने केवल 41 गेंदों पर 85 रन बनाए थे। लगातार अच्छी पारियों से अन्वय ने जूनियर क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी क्षमता का परिचय दिया है। उनकी आक्रामक शैली और बड़े स्कोर बनाने की क्षमता ने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया है।
राहुल द्रविड़ की विरासत के बीच अपनी पहचान बनाने की चुनौती
राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके बेटे के प्रदर्शन पर स्वाभाविक रूप से लोगों की नजर रहती है। हालांकि, अन्वय के लिए अपनी अलग पहचान बनाना और लगातार प्रदर्शन करना सबसे अहम होगा।
वीनू मांकड़ ट्रॉफी जैसे घरेलू आयु-वर्ग टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं। गुजरात के खिलाफ अन्वय की 151 रन की पारी उनके लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। अब देखना होगा कि वह आने वाले मुकाबलों में अपने इस प्रदर्शन को किस तरह बरकरार रखते हैं।