कथावाचक संजय कृष्ण भैया द्वारा हरिद्वार के धार्मिक महत्व और यहां होने वाले अस्थि विसर्जन संस्कार को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवादों में घिर गया है। बयान पर तीर्थ पुरोहितों संत समाज और धार्मिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। वहीं मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
चारधाम यात्रा के प्रवेश द्वार का दावा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में संजय कृष्ण भैया यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि हरिद्वार अस्थि विसर्जन के लिए नहीं बल्कि चारधाम यात्रा के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने दावा किया कि हरिद्वार में केवल एक घाट पर अस्थि विसर्जन किया जाता है जहां गंगा में लोहे का जाल लगाया गया है। कथावाचक ने यह भी आरोप लगाया कि उस जाल में एकत्रित होने वाली अस्थियों को बाद में निकालकर देहरादून की किसी कप-प्लेट बनाने वाली फैक्ट्री को बेच दिया जाता है।
वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया किसी अन्य तीर्थ से जुड़ी हुई है और यह परंपरा न तो हरिद्वार में है और न ही गया जी में। उनके इस बयान के सामने आने के बाद तीर्थनगरी हरिद्वार में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

गंगा सभा ने जताई कड़ी आपत्ति
गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने संजय कृष्ण भैया के बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह बयान हरिद्वार की सनातन परंपराओं धार्मिक मान्यताओं और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है।
तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि हरिद्वार सदियों से हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक रहा है और यहां अस्थि विसर्जन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में बिना तथ्यों के इस प्रकार के बयान देना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
गंगा सभा और तीर्थ पुरोहितों ने संकेत दिए हैं कि कथावाचक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि जल्द ही संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने के लिए पुलिस प्रशासन को शिकायत सौंपी जाएगी।
श्रद्धालुओं में भी नाराजगी
विवादित बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों ने हरिद्वार की धार्मिक परंपराओं पर की गई टिप्पणी को अनुचित बताया है। उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक विषय पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की पुष्टि की जानी चाहिए ताकि लोगों की आस्था को ठेस न पहुंचे।
फिलहाल इस मामले को लेकर धार्मिक संगठनों और कथावाचक के समर्थकों के बीच चर्चा तेज है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।