भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार, 26 जुलाई को निवाड़ी जिले की ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी ओरछा के कंचना घाट पर आयोजित कार्यक्रम में आमजन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का श्रवण किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के संदेश को प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
'कैच द रेन' अभियान में मध्यप्रदेश की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में 'कैच द रेन' अभियान का उल्लेख करते हुए मध्यप्रदेश के सीधी और नरसिंहपुर जिलों में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और आम जनता की सहभागिता से जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी परिणाम सामने आए हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सीधी जिले में लगभग 1500 तालाबों का निर्माण किया गया है, जिससे वर्षा जल का बेहतर संचयन हो रहा है और भूजल स्तर में सुधार की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। वहीं नरसिंहपुर जिले में अमृत सरोवरों का संरक्षण, पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण कर उन्हें जल संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक हैं।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पानी का संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी इसके लिए आवश्यक है। उन्होंने देशवासियों से अपने आसपास मौजूद तालाब, कुएं, बावड़ियों और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की जिम्मेदारी लेने तथा उन्हें संरक्षित करने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि "आज बचाई गई पानी की हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।" यदि समाज सामूहिक रूप से जल संरक्षण के लिए आगे आएगा, तो देश भविष्य में जल संकट जैसी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेगा।
'जहां जब बारिश गिरे, पानी को वहीं सहेजिए'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'कैच द रेन' अभियान का मूल संदेश है—"जहां जब बारिश गिरे, पानी को वहीं सहेजिए।" इसी उद्देश्य से 4 जुलाई से पूरे देश में विशेष जल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत वर्षा जल संचयन, ग्राउंड वॉटर रिचार्ज, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन, अमृत सरोवरों के विकास तथा बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैसे कार्यों को गति दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि गांवों से लेकर शहरों तक, पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी की है। कई स्थानों पर वर्षों पुराने तालाबों की गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाई जा रही है। कुओं और बावड़ियों को पुनर्जीवित किया जा रहा है तथा बंद पड़े बोरवेल को भूजल रिचार्ज के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।
अन्य राज्यों के प्रयासों का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए नवाचारों और जनभागीदारी आधारित अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में जल संरक्षण को लेकर लोगों में बढ़ती जागरूकता एक सकारात्मक संकेत है और इससे आने वाले समय में जल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने दिया जनभागीदारी का संदेश
कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में जल संरक्षण से जुड़े अनेक अभियान सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाकर जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में अपना योगदान दें।