Abhijeet Dipke Father Statement: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर 37 दिनों से चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन समाप्त हो गया। इस बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवान शंकर दीपके का बयान सुर्खियों में है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा राजनीति में आने की कोई योजना नहीं रखता। उनका सपना हमेशा से अभिजीत को एक सिविल सर्विस अधिकारी (UPSC) के रूप में देखने का था। उन्होंने यह भी बताया कि बेटे की उच्च शिक्षा के लिए लिया गया एजुकेशन लोन आज भी वह चुका रहे हैं।
'मेरा सपना था बेटा UPSC अधिकारी बने'
एक इंटरव्यू में भगवान शंकर दीपके ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी पहचान बना लेगा। उन्होंने कहा कि परिवार का राजनीति से कभी कोई संबंध नहीं रहा। उनके शब्दों में- "अभिजीत कभी राजनीति में नहीं जाएगा। हमारे परिवार में कोई राजनीति में नहीं रहा। मेरा सपना था कि वह UPSC पास करके सिविल सर्विस में जाए और उसका भविष्य सुरक्षित बने।"
लाठीचार्ज की खबर सुनकर भावुक हो गए थे पिता
भगवान शंकर दीपके ने बताया कि आंदोलन के दौरान वह लगातार अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। उन्होंने बताया-
आंदोलन के दौरान अभिजीत डेंगू और टाइफाइड से भी पीड़ित हुआ।
कई बार मन हुआ कि दिल्ली जाकर उसे वापस घर ले आएं।
लेकिन छात्रों के प्रति उसके समर्पण को देखते हुए ऐसा नहीं किया।
20 जुलाई को लाठीचार्ज की खबर सुनकर वह पूरे दिन भावुक रहे।
उन्होंने कहा कि उस दिन उनकी आंखों से आंसू नहीं रुके।
इंजीनियर नहीं, पत्रकार बनना चाहते थे अभिजीत
भगवान शंकर दीपके खुद सिविल इंजीनियर हैं और चाहते थे कि उनका बेटा भी इंजीनियर बने। अभिजीत ने-
छत्रपति संभाजीनगर के सरस्वती भुवन कॉलेज से स्कूली शिक्षा पूरी की।
पुणे के सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट में इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।
बाद में इंजीनियरिंग छोड़कर पत्रकारिता की पढ़ाई की।
2021 में तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ से पत्रकारिता में स्नातक किया।
AAP और शिक्षा विभाग के साथ भी किया काम
पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिजीत ने-
आम आदमी पार्टी (AAP) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काम किया।
दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशन एडवाइजर के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।
यहीं से उनकी सार्वजनिक पहचान बढ़नी शुरू हुई।
बोस्टन यूनिवर्सिटी भेजने के लिए लिया एजुकेशन लोन
भगवान शंकर दीपके ने बताया कि पत्रकारिता के बाद अभिजीत ने पब्लिक रिलेशंस (PR) में उच्च शिक्षा लेने की इच्छा जताई। उस समय वह सेवानिवृत्ति के करीब थे, फिर भी उन्होंने-
एजुकेशन लोन लिया।
बेटे को अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी भेजा।
आज भी उसी लोन की EMI चुका रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बेटे की पढ़ाई उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।
कैसे हुई CJP की शुरुआत?
भगवान शंकर दीपके के मुताबिक, अमेरिका में पढ़ाई के दौरान अभिजीत सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थे। बाद में एक सार्वजनिक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम से ऑनलाइन अभियान शुरू हुआ। कुछ ही समय में-
लाखों लोग सोशल मीडिया से जुड़े।
ऑनलाइन अभियान जंतर-मंतर तक पहुंचा।
बाद में यह एक बड़े छात्र आंदोलन का हिस्सा बन गया।
अभिजीत दीपके की शिक्षा यात्रा
| चरण | विवरण |
|---|---|
| स्कूली शिक्षा | सरस्वती भुवन कॉलेज, छत्रपति संभाजीनगर |
| इंजीनियरिंग | सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट, पुणे |
| पत्रकारिता | तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ, 2021 |
| उच्च शिक्षा | बोस्टन यूनिवर्सिटी (PR) |