हरिद्वार : धर्मनगरी हरिद्वार के शिवालिक पर्वतमाला पर स्थित मां मनसा देवी मंदिर का विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व है। यही वजह है कि मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है लेकिन नवरात्र के दौरान भक्तों की संख्या में खासा इजाफा हो जाता है। इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना मां मनसा देवी पूरी करती हैं। इसी विश्वास के साथ भक्त मंदिर परिसर में स्थित कचनार के पेड़ पर धागा बांधकर अपनी मनोकामना मांगते हैं।
मां मनसा देवी के दर्शन के लिए देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
मां मनसा देवी मंदिर हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। नवरात्र के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है। भक्त मां की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि खुशहाली और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
मान्यता है कि मां मनसा देवी अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसी आस्था के चलते देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं।
भगवान शिव की मानस पुत्री मानी जाती हैं मां मनसा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री माना जाता है। कुछ प्राचीन ग्रंथों में उन्हें महर्षि कश्यप की पुत्री बताया गया है। मां मनसा को नागों के राजा नागराज वासुकी की बहन के रूप में भी जाना जाता है।
मनसा शब्द का अर्थ मनोकामना से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ मां की आराधना करते हैं उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भक्त इसी विश्वास के साथ मंदिर पहुंचकर मां से अपनी इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
कचनार के पेड़ पर धागा बांधकर मांगते हैं मनोकामना
मां मनसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच कचनार के पेड़ पर धागा बांधने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हुए पेड़ पर धागा बांधते हैं। यह परंपरा श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।
मान्यता है कि मां मनसा देवी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के साथ ही उन्हें कष्टों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। नागराज वासुकी की बहन होने के कारण मां को नागों से संबंधित दोषों विशेषकर कालसर्प दोष से रक्षा करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है।
मंदिर में स्थापित हैं मां भगवती की दो मूर्तियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर में भगवती की दो मूर्तियां स्थापित हैं। इनमें से एक मूर्ति की दस भुजाएं और पांच मुख बताए जाते हैं जबकि दूसरी मूर्ति अठारह भुजाओं वाली है। मां के इन स्वरूपों को शक्ति साहस और दुष्ट शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है।
मां भगवती की आराधना को बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। नवरात्र के दौरान भक्त मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
महिषासुर के वध से जुड़ी है मां दुर्गा की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार जब महिषासुर नामक दैत्य के अत्याचार से देवता और अन्य लोकों के प्राणी परेशान हो गए तब देवताओं ने ब्रह्मा विष्णु और महेश की शरण ली। उन्होंने महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।
मान्यता है कि देवताओं की पुकार सुनकर ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित अन्य देवताओं के शरीर से दिव्य तेज प्रकट हुआ। सभी के तेज के एकत्रित होने से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।
इस कथा को दैवीय शक्ति की विजय और अधर्म के अंत का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा की इसी शक्ति की नवरात्र के दौरान विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।
नवरात्र को लेकर मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं
नवरात्र के दौरान मां मनसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए हैं। मंदिर में आने वाले भक्तों को दर्शन और पूजा-अर्चना के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
नवरात्र के पावन अवसर पर हरिद्वार में मां मनसा देवी के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्त मां के दरबार में माथा टेककर परिवार की खुशहाली सुख-समृद्धि और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांग रहे हैं।