कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी बुधवार को कथित "डीजे" बयान मामले में अपना वॉयस सैंपल देने के लिए बिधाननगर कोर्ट पहुंचे। उनकी पेशी को लेकर अदालत परिसर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए। पुलिस और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
क्या है पूरा मामला?
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी के कथित "डीजे बजेगा" बयान को लेकर एक समाजसेवी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि इस बयान से लोगों में भय का माहौल बना और चुनाव के बाद हिंसा के लिए उकसाया गया। अदालत के निर्देश पर इस मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई।
दो बार टाली थी पेशी
सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पहले दो बार वॉयस सैंपल देने के लिए बुलाया था, लेकिन वह दोनों बार निर्धारित तारीख पर अदालत नहीं पहुंचे। इसके बाद मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने जांच में सहयोग नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।
हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
10 जुलाई को सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि यदि अभिषेक बनर्जी जांच में सहयोग नहीं करते और वॉयस सैंपल नहीं देते, तो उन्हें मिली कानूनी राहत वापस ली जा सकती है। अदालत ने सीआईडी जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था।
अंडे फेंके जाने की आशंका पर बढ़ी सुरक्षा
अभिषेक बनर्जी के वकील ने अदालत से अनुरोध किया था कि पेशी के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि अंडे फेंकने या किसी अन्य विरोध की घटना न हो। इससे पहले विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद सोनारपुर में उनके काफिले पर अंडे फेंके गए थे और विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस व केंद्रीय बलों की सुरक्षा में उन्हें वहां से बाहर निकाला गया था।
जांच में सहयोग की दिशा में अहम कदम
बुधवार को अदालत में उपस्थित होकर अभिषेक बनर्जी ने वॉयस सैंपल देने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। अब सीआईडी इस नमूने को मामले में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर जांच को आगे बढ़ाएगी।