कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी नगर निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और वाम-कांग्रेस खेमे की बैठकों पर कटाक्ष करते हुए विपक्ष को ‘छन्नछाड़ा’ यानी दिशाहीन करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने जंगलमहल के आदिवासी समुदायों के विकास, पुरुलिया सदर अस्पताल की अव्यवस्थाओं, चोरबागान भगदड़ मामले की जांच और डेंगू की स्थिति पर भी अपनी बात रखी।शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान घोष ने कहा कि बंगाल की जनता अब राजनीतिक दलों के दावों और गठबंधनों से अधिक उनके कामकाज को महत्व देती है। हालांकि, विपक्ष की राजनीतिक स्थिति और जनता के रुख को लेकर उनकी टिप्पणियां राजनीतिक आकलन हैं।
निकाय चुनाव से पहले विपक्ष पर निशाना
दिलीप घोष ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान आम लोगों ने उत्सव का आनंद लिया, लेकिन विपक्षी दल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझे रहे। उन्होंने दावा किया कि लंबे समय तक राज्य की राजनीति में प्रभाव रखने वाले दलों की विश्वसनीयता कमजोर हुई है और आगामी नगर निकाय चुनावों में इसका असर दिखाई दे सकता है। तृणमूल कांग्रेस के कुछ पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान दल-बदल की घटनाएं होती रहती हैं। इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी का नेतृत्व करेगा। भाजपा की ओर से मेयर पद के संभावित चेहरे को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी घोष ने स्पष्ट किया कि पार्टी में सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया अपनाई जाती है। उनके मुताबिक, उम्मीदवारों का चयन चुनावी संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाता है और निर्वाचित प्रतिनिधि बाद में अपने नेता का चयन करते हैं।
शबर और टोटो समुदायों के विकास पर जोर
जंगलमहल के आदिवासी इलाकों में विकास योजनाओं को लेकर दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के प्रस्तावित झाड़ग्राम दौरे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शबर और लोढ़ा जैसे समुदाय लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना करते रहे हैं। घोष के अनुसार, पंचायत विभाग ने जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए सूची तैयार कर भेजी है। सरकार का लक्ष्य इन समुदायों तक आवास, शिक्षा, स्वच्छ पेयजल और पोषण संबंधी सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक योजनाओं का उद्देश्य वंचित समुदायों को बेहतर जीवन-स्तर उपलब्ध कराना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना होना चाहिए। हालांकि, प्रस्तावित दौरे और योजनाओं की प्रगति से संबंधित आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही इनके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।
पुरुलिया सदर अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर सवाल
पुरुलिया सदर अस्पताल में कथित अव्यवस्थाओं और स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के संदर्भ में घोष ने पिछली सरकारों के कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्तियों और ठेका व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार के कारण अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हुई। घोष ने दावा किया कि कुछ अस्पतालों में सफाई और रखरखाव की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। उन्होंने खड़गपुर अस्पताल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उनका कहना था कि मौजूदा प्रशासन को अस्पतालों में कर्मचारियों की उपस्थिति, सफाई एजेंसियों के कामकाज और सेवा व्यवस्था की नियमित निगरानी करनी चाहिए। हालांकि, नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और कटमनी के आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच या आधिकारिक दस्तावेजों से ही की जा सकती है।
चोरबागान भगदड़ मामले में निष्पक्ष जांच की बात
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ को लेकर भी दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है और जांच पूरी होने तक निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना चाहिए। हादसे की जांच में माइक से की गई घोषणा, भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास मार्गों तथा आयोजकों और प्रशासन की भूमिका जैसे पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण है। इस मामले में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच एजेंसी के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्य निर्णायक होंगे। घोष ने विपक्ष की ओर से जांच को लेकर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में धैर्य रखने की बात कही। हालांकि, जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
मदन मित्र के बयान पर तंज
तृणमूल कांग्रेस के नेता मदन मित्र के राजनीति से दूरी बनाने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का उद्देश्य जनसेवा होना चाहिए और केवल सत्ता का लाभ उठाने की सोच रखने वालों को अंततः निराशा का सामना करना पड़ सकता है। उनकी टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियों और नेताओं के हालिया बयानों को लेकर जारी बहस के बीच आई है।
डेंगू की रोकथाम पर प्रशासन की भूमिका
हावड़ा के बांकड़ा इलाके में डेंगू के मामलों को लेकर भी घोष ने अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान बुखार के मामलों की रिपोर्टिंग और उनसे जुड़े आंकड़ों को लेकर पारदर्शिता की कमी थी। उन्होंने दावा किया कि पूजा के दौरान भी सफाईकर्मी फॉगिंग, जलजमाव हटाने और मच्छरों के प्रजनन को रोकने के काम में लगे रहे। घोष के मुताबिक, डेंगू की रोकथाम के लिए पंचायत और नगर निकाय स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं। डेंगू की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़े, प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी और रोकथाम संबंधी उपायों का विवरण महत्वपूर्ण होगा।
चुनावी माहौल में विकास और जवाबदेही पर बहस
दिलीप घोष के बयान ऐसे समय आए हैं, जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दल आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। विपक्ष पर हमले के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों के विकास, अस्पतालों की व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन रहे हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सरकार के कामकाज, विपक्ष की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि राजनीतिक दावों का जमीनी स्तर पर कितना असर पड़ता है।