कोलकाता: उत्तर 24 परगना के चर्चित कामदुनी दुष्कर्म एवं हत्या मामले में 13 वर्ष बीत जाने के बावजूद अंतिम न्याय नहीं मिलने से पीड़िता का परिवार अब भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। इसी मांग को लेकर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं टुम्पा कोयाल और मौसुमी कोयाल मुख्यमंत्री के 'जनता दरबार' पहुंचीं और मामले में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री से लगाई अंतिम न्याय की गुहार
पीड़िता के परिवार ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए कहा कि वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। परिवार का आरोप है कि मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में लगातार देरी हुई, जिससे दोषियों को सजा मिलने की प्रक्रिया अधूरी रह गई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर जल्द अंतिम फैसला सुनिश्चित कराने की मांग की।
सीआईडी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर उठाए सवाल
परिवार ने आरोप लगाया कि सीआईडी जांच और पूरे मामले की प्रगति में गंभीर लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बावजूद अब तक मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो सका है, जिससे परिवार निराश और आक्रोशित है।
2013 की घटना ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया था
7 जून 2013 को उत्तर 24 परगना के कामदुनी में एक कॉलेज छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे पश्चिम बंगाल में भारी जनाक्रोश फैल गया था। स्थानीय लोगों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए थे और मौसुमी कोयाल व टुम्पा कोयाल इस आंदोलन की प्रमुख आवाज बनकर सामने आई थीं।
परिवार का आरोप- '16 बार बदले गए लोक अभियोजक'
जनता दरबार में पहुंचे पीड़िता के परिवार के एक सदस्य ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने वोट बैंक की राजनीति के कारण 16 बार लोक अभियोजक (पीपी) बदले। उनका कहना है कि इसी वजह से उन्हें सही तरीके से न्याय नहीं मिल पाया। परिवार का दावा है कि आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की, जिसके बाद फांसी और आजीवन कारावास की सजा पाए कुछ आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
कामदुनी फाइल खोलने की मांग फिर तेज
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद आरजी कर मामले की फाइल दोबारा खुलने के बाद कामदुनी मामले को लेकर भी नई उम्मीद जगी थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने भी कामदुनी मामले की फाइल दोबारा खोलने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में पीड़िता का परिवार एक बार फिर अंतिम न्याय की मांग को लेकर सरकार के दरवाजे पर पहुंचा है।
न्याय का इंतजार अब भी जारी
घटना की जांच सीआईडी को सौंपी गई थी और अदालत में सुनवाई भी शुरू हुई, लेकिन 13 वर्ष बाद भी मामला अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंच सका है। ऐसे में पीड़िता का परिवार अब भी यही सवाल उठा रहा है कि आखिर उन्हें न्याय कब मिलेगा।