कोलकाता: पश्चिम बंगाल के स्कूलों में पढ़ाई के पाठ्यक्रम को लेकर राज्य सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए पाठ्यक्रम में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और इतिहास के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के इतिहास एवं राज्य के महान विभूतियों पर विशेष जोर दिया जाएगा। वहीं, पाठ्यक्रम से सिंगुर आंदोलन का अध्याय हटाने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा, पांचवीं से आठवीं कक्षा तक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की पढ़ाई अनिवार्य होगी। बुधवार को स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने नई शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन बदलावों की जानकारी दी।
नए पाठ्यक्रम में बंगाल के इतिहास पर विशेष जोर
शिक्षा मंत्री ने बताया कि पाठ्यक्रम समिति ने अपना काम पूरा कर लिया है। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पश्चिम बंगाल के इतिहास, संस्कृति और प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा। इसी क्रम में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों को अपने राज्य के इतिहास और ऐतिहासिक विरासत की बेहतर जानकारी होनी चाहिए।
सिंगुर आंदोलन का अध्याय हटाने पर क्या बोले शिक्षा मंत्री?
नए पाठ्यक्रम में सिंगुर आंदोलन के इतिहास को जगह नहीं दी गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही इस बदलाव की जानकारी दे चुके थे। इस संबंध में शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने कहा कि विद्यार्थियों को सिंगुर आंदोलन के बारे में विशेष जानकारी नहीं थी। इसी वजह से पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। इस फैसले को लेकर शिक्षा जगत में चर्चा तेज होने की संभावना है।
पांचवीं से आठवीं कक्षा तक ICT की पढ़ाई होगी अनिवार्य
स्कूलों में तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने के लिए पांचवीं से आठवीं कक्षा तक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की किताबें शुरू की जा रही हैं। मंत्री के मुताबिक, पहले इस विषय का उल्लेख तो पाठ्यक्रम में था, लेकिन इसके लिए कोई निर्धारित और व्यवस्थित सिलेबस नहीं था। अब एक औपचारिक पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, जिससे स्कूली स्तर पर विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा व्यवस्थित तरीके से दी जा सकेगी।
सातवीं और आठवीं कक्षा में तीसरी भाषा की नई किताब
नई शिक्षा व्यवस्था के तहत सातवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा की किताबें भी जोड़ी जाएंगी। इसके साथ ही सभी नई पाठ्यपुस्तकों की शुरुआत 'वंदे मातरम्' से होगी। शिक्षा मंत्री ने बताया कि किताबों की गुणवत्ता और पन्नों के स्तर में भी सुधार किया गया है।
पास-फेल नीति पर अभी अंतिम फैसला नहीं
स्कूलों में पास-फेल नीति को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस मुद्दे पर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के बीच विचार-विमर्श जारी है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, सरकार इस मामले में अंतिम निर्णय की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्कूलों की परीक्षा और परिणाम व्यवस्था में भी बदलाव की संभावना पर नजर बनी हुई है।