अक्सर लोगों को यह भ्रम रहता है कि यदि कोई बैंक खाता वर्षों से इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो उसमें जमा पैसा खत्म हो जाता होगा। जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश मामलों में पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और वह केवल ‘अनक्लेम्ड डिपॉजिट’ की श्रेणी में चला जाता है। ऐसे खाते आमतौर पर तब बनते हैं जब खाताधारक स्थान बदल लेता है, दस्तावेज खो जाते हैं या परिवार को खाते की जानकारी ही नहीं होती।
UDGAM पोर्टल क्या है?
इन भूले-बिसरे खातों का पता लगाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने UDGAM पोर्टल शुरू किया है। UDGAM का पूरा नाम Unclaimed Deposits Gateway to Access Information है। यह एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से देश के कई बैंकों में मौजूद अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स की जानकारी एक ही जगह सर्च की जा सकती है। पहले लोगों को अलग-अलग बैंकों की शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और सरल हो गई है।
UDGAM पोर्टल की भूमिका और सीमाए
यह समझना जरूरी है कि UDGAM पोर्टल केवल जानकारी उपलब्ध कराने का माध्यम है। इसके जरिए सीधे पैसे नहीं निकाले जा सकते। पोर्टल यह बताता है कि किसी व्यक्ति के नाम पर किसी बैंक में कोई अनक्लेम्ड राशि है या नहीं। इसके बाद वास्तविक क्लेम की प्रक्रिया संबंधित बैंक के माध्यम से ही पूरी की जाती है।
UDGAM पोर्टल पर सर्च कैसे करें?
UDGAM पोर्टल पर जाकर उपयोगकर्ता को अपना नाम, जन्मतिथि जैसी बुनियादी जानकारी दर्ज करनी होती है। बेहतर परिणाम पाने के लिए नाम की अलग-अलग स्पेलिंग से भी सर्च करना चाहिए, क्योंकि पुराने बैंक रिकॉर्ड में नाम अलग तरीके से दर्ज हो सकता है। यदि आप अपने माता-पिता या किसी अन्य रिश्तेदार के खाते की जानकारी ढूंढ रहे हैं, तो वही नाम भरें जो पुराने पासबुक, एफडी रसीद या बैंक दस्तावेजों में लिखा हुआ हो।
नाम दिखने के बाद अगला कदम क्या है?
यदि पोर्टल पर आपके नाम से कोई एंट्री दिखाई देती है, तो इसे अंतिम पुष्टि न मानें। इसके बाद संबंधित बैंक से संपर्क करना जरूरी होता है। बैंक KYC दस्तावेजों के जरिए रिकॉर्ड का मिलान करता है। यदि खाताधारक स्वयं क्लेम कर रहा है, तो प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल होती है। वहीं, कानूनी वारिस के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र, उत्तराधिकार से जुड़े दस्तावेज और पहचान पत्र देने पड़ सकते हैं।
10 साल से पुराने अनक्लेम्ड पैसे का क्या होता है?
यदि कोई जमा राशि 10 साल से अधिक समय तक क्लेम नहीं की जाती, तो बैंक उसे RBI के Depositor Education and Awareness Fund (DEAF) में ट्रांसफर कर देते हैं। हालांकि इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि खाताधारक या उसके कानूनी वारिस आज भी बैंक के माध्यम से पूरी प्रक्रिया अपनाकर उस राशि को वापस पा सकते हैं।
सर्च करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
UDGAM पोर्टल पर सर्च करते समय धैर्य रखना जरूरी है और नाम व उपनाम के अलग-अलग संयोजन आजमाने चाहिए। पुराने मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां संभालकर रखें, क्योंकि पहचान सत्यापन के दौरान ये बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं। सही जानकारी और दस्तावेजों के साथ यह पोर्टल वर्षों से अटके पैसों को वापस पाने का एक भरोसेमंद और आसान रास्ता बन सकता है।
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