आत्मनिर्भर भारत अभियान और वोकल फ़ॉर लोकल की पहल के बाद देशभर में MSME सेक्टर ने नई जान फूंकी है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा और महिलाएँ उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं। स्थानीय उत्पादों—हस्तशिल्प, कृषि प्रसंस्करण, टेक्सटाइल और छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट—को अब बाज़ार में बेहतर पहचान मिल रही है। इससे आर्थिक गतिविधि का दायरा गाँवों तक पहुंचा है।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने बदली तस्वीर
डिजिटल इंडिया के विस्तार ने MSME सेक्टर को सीधे ग्राहकों से जोड़ने का काम किया है। पहले जो उत्पाद केवल स्थानीय हाट–बाज़ार तक सीमित थे, अब वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ई–कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर बिक रहे हैं। आसान डिजिटल भुगतान और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क ने व्यवसाय चलाना पहले से अधिक सरल बना दिया है। इससे व्यापारियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
सरकारी योजनाओं से मिल रहा सहारा
सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले आसान ऋण, प्रशिक्षण और मेंटरशिप कार्यक्रम MSME इकाइयों को तकनीकी रूप से सशक्त बना रहे हैं। साथ ही, नयी नीतियाँ उद्यमियों को जोखिम उठाने और नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इससे लघु उद्योग धीरे–धीरे संगठित और प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं।
रोज़गार और GDP में बड़ा योगदान
MSME को अब भारत की आर्थिक रीढ़ माना जा रहा है। लाखों युवाओं को रोजगार मिलने के साथ यह सेक्टर GDP और निर्यात में भी अहम भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो भारत आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में और मजबूत कदम बढ़ा सकता है।
देश के नए इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर—हाईवे, रेलवे और लॉजिस्टिक्स में बड़ा बदलाव, बड़े प्रोजेक्ट से मजबूत कनेक्टिविटी
देश में चल रहे हाईवे, एक्सप्रेसवे और नई रेलवे लाइन परियोजनाएँ यात्रा समय कम करने के साथ व्यापार को भी गति दे रही हैं। नए मार्गों के विकसित होने से दूर–दराज़ के इलाकों तक पहुंच आसान हुई है। इससे पर्यटन, उद्योग और सेवाक्षेत्र को सीधा लाभ मिल रहा है।
लॉजिस्टिक्स लागत में सुधार
फ्रेट कॉरिडोर और मल्टी–मोडल लॉजिस्टिक्स हब बनने से माल ढुलाई पहले से तेज़ और सस्ती हुई है। इससे व्यापारिक लागत घटने के साथ भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति बना रहा है। उद्योग जगत इसे गेम–चेंजर मान रहा है।
टियर–2 और टियर –3 शहरों को बढ़ावा
नई कनेक्टिविटी के कारण छोटे शहरों में निवेश आकर्षित हो रहा है। इन शहरों में IT, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर तेज़ी से विकसित हो रहे हैं। इससे ग्रामीण युवाओं को भी अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलने लगा है।
दीर्घकालिक आर्थिक लाभ
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को लंबी अवधि में भारत की आर्थिक मजबूती का आधार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निवेशकों का विश्वास और मजबूत होगा।
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