मध्य प्रदेश के चित्रकूट में मंगलवार (16 जनवरी) को श्रीराम पथ गमन न्यास की पहली बैठक आयोजित हुई। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने की। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "अयोध्या की तरह ही चित्रकूट में भी विकास कराए जाएंगे। जिन स्थानों से भगवान राम गुजरे, उन स्थानों को सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा।"
विद्वानों से लिया जायेगा परामर्श
मंगलवार (16 जनवरी) को चित्रकूट में आयोजित श्री रामपथ गमन न्यास की बैठक में भगवान राम के वन गमन से जुड़े 8 जिलों में कराए जाने वाले कार्यों को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि विद्वानों के परामर्श से चित्रकूट सहित श्री राम वन पथ गमन मार्ग के सभी प्रमुख स्थलों का विकास किया जाएगा। इसकी कार्य योजना बनाकर चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे।गुरुकुल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल
आयोजित बैठक में जिन विषयों को लेकर चर्चा की गई, उसमें प्रसाद योजना के अंतर्गत अमरकंटक में काम कराए जाने वाले काम प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा चित्रकूट में कामदगिरी परिक्रमा पथ, बृहस्पति कुंड, मंदाकिनी नदी के लिए चित्रकूट में घाटों का विकास कराया जाएगा। इसके अलावा लीला गुरुकुल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल है।भगवान राम ने चित्रकूट में बिताया सबसे ज्यादा समय
बता दें मध्य प्रदेश में राम वन गमन पथ चित्रकूट से अमरकंटक तक 370 किलोमीटर है। यहां भगवान राम ने वनवास के दौरान 11 साल 11 महीने और 11 दिन का समय गुजारा। भगवान राम जिस रास्ते से गुजरे उसे राम वन गमन पथ कहा जाता है। प्रदेश में सतना, पन्ना, कटनी, जबलपुर, नर्मदापुरम, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिले के स्थलों को चिन्हित किया गया। इसमें स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी, अत्रि आश्रम, शरभंग आश्रम, अश्वमुनि आश्रम, सुतीक्ष्ण आश्रम, सिद्धा पहाड़, सीता रसोई, रामसेल, राम जानकी मंदिर, बृहस्पति कुंभ, अग्निजिन्हा आश्रम, अगस्त्य आश्रम, शिव मंदिर, रामघाट, श्रीराम मंदिर, मार्कडेय आश्रम, दशरथ घाट, सीता मढ़ी शामिल है।Read More: ग्वालियर से अयोध्या के लिए शुरू हुई नई फ्लाइट, केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia ने किया शुभारंभ
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