मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के परिणाम आने में अभी एक हफ्ते का वक्त बचा है। मगर अभी से ही राजनीतिक दल अपनी पार्टी की जीत को लेकर जोड़-घटाव करने में लगे हुए हैं। उज्जैन संभाग की 29 विधानसभा सीटों में से 16 पर कांग्रेस अपना कब्जा जमाने का दावा कर रही है। जबकि बीजेपी का कहना है कि साल 2013 जैसा हाल इस बार भी होने वाला है। मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच इस बार प्रतिष्ठा की लड़ाई देखने को मिली है। इस विधानसभा चुनाव को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी थी। अब दोनों ही राजनीतिक दल अपनी-अपनी सरकार बनाने को लेकर दावा भी कर रहे हैं।
कांग्रेस का उज्जैन संभाग की 29 में से 16 सीट जीतने का दावा
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव मकसूद अली ने बताया कि मध्य प्रदेश में जिस दल ने मालवांचल पर कब्जा कर लिया। उसकी सरकार बनना तय है। साल 2018 में कांग्रेस ने उज्जैन संभाग की 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें एक निर्दलीय भी शामिल था। साल 2020 में दल की अदला बदली के बाद कांग्रेस की सीट कम हो गई थी। इस बार 29 में से 16 सीट कांग्रेस के पास आने वाली हैं। इनमें नीमच जिले से एक, मंदसौर से दो, रतलाम से दो, उज्जैन से चार, देवास से तीन, शाजापुर से तीन, आगर मालवा से एक सीट जीतने का पूरा अनुमान है। इस प्रकार 29 में से कम से कम 16 सीट कांग्रेस के खाते में आएगी।'साल 2013 का हाल भूल गई कांग्रेस'
मध्य प्रदेश बीजेपी के मीडिया प्रभारी राजपाल सिंह सिसोदिया ने कहा है कि साल 2013 में उज्जैन संभाग में केवल एक सीट कांग्रेस को मिली थी। इस बार भी ऐसा ही होने वाला है। उन्होंने कहा कि साल 2018 में कांग्रेस ने झूठे वादे कर अपनी सरकार बना ली थी। किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारों को भत्ता जैसे कई झूठे वादे किए गए थे। अब मध्य प्रदेश की जनता कांग्रेस के झूठे वादों में आने वाली नहीं है। इस बार जो रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ है, उसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। उज्जैन संभाग की 29 में से 28 सीट जीतने का अनुमान है।Read More: राहुल गांधी के ‘पनौती’ वाले बयान से बढ़ी सियासी तपिश, कैलाश विजयवर्गी ने किया पलटवार
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