डिंडौरी. आदिवासी बाहुल्य जिले में नर्सिंग कॉलेज झूठ की बुनियाद पर संचालित हो रहे हैं। न्यायालय और सीबीआई जांच के बीच जिला मुख्यालय में ही तीन नर्सिंग कॉलेज इंडियन नर्सिंग काउंसिल की मान्यता के बिना ही धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। मान्यता नहीं होने से यहां नामांकित छात्रों की परीक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। मोटी फीस और छात्रवृत्ति के फेर में संचालक बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। नर्सिंग कॉलेजों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद इनका मान्यता भी रद्द कर दी गई है। हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है। गड़बड़ी सामने आने के बाद इन कॉलेजों में नामांकित नर्सिंग छात्र पिछले तीन साल से परीक्षा नहीं दे पाए हैं। सत्र 2020-21 में प्रवेश लेने वाले छात्रों की प्रथम वर्ष की परीक्षा भी अभी तक नहीं हो पाई हैं। जिले में संचालित नर्सिंग कॉलेज में जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी का 3 साल और बीएससी नर्सिंग के 4 साल के पाठ्यक्रमों में हजारों आदिवासी बच्चे अध्ययनरत हैं। यह सभी विद्यार्थी कॉलेज प्रशासन की लापरवाही और नियमो की अनदेखी के चलते परीक्षा से वंचित हैं। नर्सिंग कॉउंसिल के नियमों और मान्यता की शर्तों के विपरीत कई महाविद्यालयों में नर्सिंग क्लासेस के साथ अन्य पाठ्यक्रमों का भी संचालन हो रहा है।
आईएनसी से भी नहीं मिली मान्यता, एक ही बिल्डिंग में कई पाठ्यक्रम हो रहे संचालित
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