मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ मंत्रालय में ज्ञापन सौंपेगा। संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है। सिंह ने कर्मचारी आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अधिकारी-कर्मचारी की समस्याएं एवं मांगें
- प्रदेश सरकार ने केंद्र की तुलना में 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता कम दिया जा रहा है।
- वर्ष 2016 से पदोन्नति बंद है, जिससे विभागों का संघीय ढांचा प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों/ कर्मचारियों के सेवानिवृत्त लगातार बढ़ने से कर्मचारियों पर कार्य का बोझ बढ़ रहा है। निम्न पद पर रहकर वरिष्ठ पदों पर प्रभारी के रूप में कार्य किया जा रहा है, अनेक विभागों के मुखिया तो संविदा पर कार्य कर रहे हैं। जिससे विभागों की कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है।
- 9 वर्ष हुए सातवें वेतनमान लागू होने के बाद भी सातवें वेतनमान के अनुसार गृह भाड़ा भत्ता एवं अन्य भत्ते पुनरीक्षित नहीं किए गए हैं।
- पुरानी पेंशन जैसे मुद्दे का सरकार के द्वारा कोई हल नहीं निकाला गया, जिससे कर्मचारी एनपीएस पर ही सेवानिवृत्ति होना प्रारंभ हो गए हैं और पुरानी पेंशन लागू किए जाने की बाट जोह रहा है।
- मध्य प्रदेश शासन के निर्णय अनुसार समस्त कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान का लाभ दिया गया है, पर शिक्षा विभाग के शिक्षकों को चौथा समयमान वेतनमान के आदेश आज तक नहीं किए गए हैं ।
- स्थाई कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिल पाया है।
- अध्यापकों को वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
- प्रदेश में कई विभागों में हजारों अनुकंपा नियुक्तियां लंबित है सीपीसीटी/डीएड/टीजीटी परीक्षा का वास्ता देकर प्रदेश में अनुकंपा नियुक्तियों को रोका जा रहा है।
- नियमित पदों को समाप्त कर संविदा और आउटसोर्स में बदला जा रहा है।
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