सेना और सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि पुंछ के घने जंगलों में कुछ आतंकी सक्रिय हैं, जो यहां से अपने नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। इसके बाद एक सुनियोजित संयुक्त अभियान की रणनीति तैयार की गई। पहाड़ी और दुर्गम इलाक़े में ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सैनिकों ने उच्च स्तर की सतर्कता और कौशल का परिचय देते हुए आगे बढ़ना जारी रखा।
घने जंगलों में मिले गुप्त ठिकाने
तलाशी अभियान के दौरान जवानों को जंगलों के भीतर कई गुप्त ठिकाने मिले, जिन्हें बड़ी सावधानी से प्राकृतिक संरचनाओं के बीच छुपाकर बनाया गया था। इनमें झाड़ियों, चट्टानों और खोखली जगहों का इस्तेमाल किया गया था। यहां से हथियार, कारतूस, विस्फोटक सामग्री और संचार उपकरण बरामद किए गए। इससे संकेत मिलता है कि ये ठिकाने लंबे समय से सक्रिय थे और आतंकी इन्हें सुरक्षित अड्डों के रूप में उपयोग कर रहे थे।
बड़ी आतंकी साजिश नाकाम
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बरामद हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल भविष्य में किसी बड़े हमले के लिए किया जाना था। लेकिन सेना की त्वरित और रणनीतिक कार्रवाई ने इस साजिश को समय रहते विफल कर दिया। साथ ही जांच एजेंसियों को आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग भी मिले हैं, जिन पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
स्थानीय लोगों में बढ़ा भरोसा और सुरक्षा की भावना
ऑपरेशन के बाद क्षेत्र में गश्त और तलाशी अभियान अभी भी जारी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर विश्वास और मजबूत हुआ है। सेना ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन या सुरक्षा बलों को दें, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बरकरार रहे।
सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सफलता
यह ऑपरेशन न सिर्फ पुंछ क्षेत्र में आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है, बल्कि इससे यह संदेश भी गया है कि भारतीय सुरक्षा बल हर चुनौती का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सीमावर्ती इलाकों में ऐसी कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक संकल्प को और दृढ़ करती है।
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