ऐतिहासिक नगरी महेश्वर की अपनी अलग पहचान रही है। यह लोकमाता अहिल्या देवी की नगरी है। नर्मदा तट पर बसे इस नगरी की पौराणिक महत्व इतनी है कि मोहन कैबिनेट की मीटिंग भी 24 जनवरी को यहां होने वाली है। इसकी तैयारी भी महेश्वर में चल रही है। लेकिन इन दिनों महेश्वर की चर्चा महाकुंभ में जाकर मशहूर हुई मोनालिसा की वजह से है। मोनालिसा महेश्वर की ही रहने वाली है।
महेश्वर की रहने वाली है मोनालिसा
यदि हम बात करें मोनालिसा की तो वह मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की नर्मदा नदी के तट पर स्थापित धार्मिक पर्यटन नगरी महेश्वर से आती है। शायद महाकुंभ में सबसे ज्यादा पॉपुलैरिटी मोनालिसा को ही मिली है। महेश्वर जहां लोकमाता अहिल्यादेवी की राजधानी रही है। वहीं, अब डॉक्टर मोहन यादव आगामी 24 जनवरी को अपनी कैबिनेट की बैठक भी आयोजित करने वाले हैं।
रावण को पराजित करने वाले राजा की नगरी रही है महेश्वर
महेश्वर रावण को पराजित करने वाले हैहय वंशी राजा सहस्त्रार्जुन की राजधानी रहा है। वेद पुराण उपनिषद (वायु पुराण, नर्मदा पुराण ,स्कंद पुराण) में यह महिष्मति नाम से प्रसिद्ध था । आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित शंकर दिग्विजय के मुताबिक इसी क्षेत्र में आदि गुरु शंकराचार्य और पंडित मंडन मिश्र व उनकी पत्नी विदुषी भारती देवी का प्रसिद्ध शास्त्रार्थ हुआ था। इसके बाद महिष्मती क्षेत्र के अंतर्गत मंडन मोहल्ले को मंडलेश्वर का नाम दिया गया।
आज भी है महेश्वर का किला
यहां करीब दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्राचीन भारतीय निर्माण कला, युद्ध कौशल और रक्षा नीति के उत्तम उदाहरण के रूप में स्थापित किले का निर्माण का समय चौथी से पांचवीं शताब्दी के मध्य बताया जाता है।
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