विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने IIT मद्रास में कहा कि भारतीय विदेश नीति का उद्देश्य सीमित संसाधनों के बावजूद अधिकतम प्रभाव डालना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि तंजानिया में IIT मद्रास कैंपस के माध्यम से भारत ने वहां के संस्थान की क्षमताओं का उपयोग कर बड़ा असर डाला है।
भारत की विदेश नीति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर आधारित
बीजेपी के दिग्जगज नेता एस यशंकर ने यहां आगे कहा कि भारत की विदेश नीति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि दुनिया को कभी दुश्मन या खतरनाक माहौल के रूप में न देखना। उन्होंने कहा, “अगर आप सीमित संसाधनों के साथ समस्या सुलझाने के मोड में हैं, तो ज़्यादा से ज़्यादा असर कैसे डालेंगे, यही मुख्य चुनौती है।
हमारा लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना
डॉ. एस. जयशंकर ने IIT मद्रास में कहा कि हम अपनी ताकत और प्रतिस्पर्धा का इस्तेमाल करके, दूसरे संस्थानों और संभावनाओं का लाभ उठाते हुए यही करने की कोशिश करते हैं। विदेश मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि यही दृष्टिकोण भारतीय कूटनीति को वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली और जिम्मेदार बनाता है। उनके अनुसार, भारतीय विदेश नीति का मूल लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सकारात्मक प्रभाव बढ़ाना है।
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