विकास की असली पहचान केवल बड़ी इमारतों और उद्योगों से नहीं होती, बल्कि समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों की बेहतर देखभाल और उनके सम्मानजनक जीवन से भी होती है। इसी सोच के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में "केयर इकोनॉमी : विकसित छत्तीसगढ़" विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए मंत्री और अधिकारी
कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े शामिल हुईं। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार और समाज कल्याण विभाग के संचालक रणवीर शर्मा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजसेवियों, विषय विशेषज्ञों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
वृद्धजन, दिव्यांग, महिलाओं और बच्चों के लिए समावेशी व्यवस्था पर जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि वृद्धजन, दिव्यांगजन, महिलाओं और बच्चों के लिए सम्मानजनक, सुरक्षित और समावेशी व्यवस्था तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों की देखभाल के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करना एक संवेदनशील और विकसित समाज की पहचान है।
केयर सेक्टर में निवेश से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि केयर सेक्टर में निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी मजबूत किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि केयर इकोनॉमी को बढ़ावा देने से सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
केयर इकोनॉमी को लेकर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
कार्यशाला में शामिल समाजसेवियों, विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने केयर इकोनॉमी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान जरूरतमंद वर्गों की देखभाल, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन को लेकर विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक ऐसी केयर व्यवस्था विकसित करने की दिशा में चर्चा करना रहा, जो समावेशी विकास को मजबूती दे सके।