रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों को गिनाते हुए दावा किया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। वहीं कांग्रेस ने इन दावों को जमीनी हकीकत से दूर बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
स्वस्थ बस्तर अभियान का दूसरा चरण होगा शुरू
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि स्वस्थ बस्तर अभियान के पहले चरण को सकारात्मक सफलता मिली है। पहले चरण में गांव-गांव स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच और उपचार किया गया। अब अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।
मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी, केंद्र से मिले 400 करोड़
स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार से 400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है। इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत करने में किया जाएगा।
मलेरिया नियंत्रण और एंबुलेंस सेवाओं पर सरकार का फोकस
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में मलेरिया नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में मलेरिया से हुई तीन मौतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को रोकना विभाग की प्राथमिकता है। इसके अलावा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करते हुए प्रदेश में 375 नई संजीवनी एक्सप्रेस 108 एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं।
कांग्रेस ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल
दूसरी ओर कांग्रेस ने सरकार के दावों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश के कई अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी पर्याप्त नहीं हैं और सरकार केवल उपलब्धियों का प्रचार कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
सरकार बनाम विपक्ष, अब दूसरे चरण पर निगाहें
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार जहां सुधार और स्वस्थ बस्तर अभियान की सफलता का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इन दावों को वास्तविक स्थिति से अलग बता रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर अभियान के दूसरे चरण पर रहेगी कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में कितना प्रभावी बदलाव ला पाता है।