रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर अब केवल बिजली विभाग की योजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने और बिजली बिल बढ़ने की शिकायतों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और राजनांदगांव समेत कई इलाकों में लोगों ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ नाराजगी जताई है।
कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के मुद्दे को बनाया राजनीतिक हथियार
जनता के बीच बढ़ती नाराजगी को देखते हुए कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के मुद्दे को सरकार के खिलाफ प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। पार्टी का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
भूपेश बघेल ने पुराने मीटर लगाने की मांग की
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों से पुराने मीटर दोबारा लगाए जाने की मांग करने की अपील की है। उनका कहना है कि जिन उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर को लेकर परेशानी है, उन्हें नया मीटर हटाकर पुराने मीटर लगाने के लिए आवेदन करना चाहिए।
दीपक बैज बोले- राज्यव्यापी आंदोलन को करेंगे तेज
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी स्मार्ट मीटर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की है। उन्होंने संकेत दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अपने राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज करेगी। पार्टी की कोशिश है कि स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिल के मुद्दे को प्रदेशभर में जनता के बीच ले जाया जाए।
बिजली बिल और महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी
महंगाई और बिजली बिल जैसे मुद्दे सीधे आम आदमी की जेब से जुड़े हैं। ऐसे में कांग्रेस स्मार्ट मीटर के मुद्दे को जनता की नाराजगी से जोड़कर भाजपा सरकार के खिलाफ जनआक्रोश में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और जोर पकड़ सकता है।
भाजपा ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का लगाया आरोप
वहीं भाजपा स्मार्ट मीटर को बिजली व्यवस्था में तकनीकी सुधार और आधुनिक व्यवस्था की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है। सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर भावनात्मक मुद्दा बनाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
2028 विधानसभा चुनाव से पहले बन सकता है बड़ा मुद्दा
स्मार्ट मीटर को लेकर जारी सियासी बयानबाजी और विरोध प्रदर्शनों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मुद्दा 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है? अगर आने वाले दिनों में स्मार्ट मीटर और बिजली बिल को लेकर जनता का विरोध बढ़ता है, तो कांग्रेस इसे भाजपा सरकार के खिलाफ एक बड़े जनमुद्दे के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। वहीं भाजपा के सामने इस मुद्दे पर जनता की शंकाओं को दूर करने और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की चुनौती होगी।