रायपुर: छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के बाद नई पदस्थापना वाले स्कूलों में समय-सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों और अधिकारियों पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 273 से अधिक शिक्षकों का वेतन रोक दिया है। वहीं, आदेशों की अनदेखी और कार्रवाई में ढिलाई बरतने के आरोप में 5 संभागीय संयुक्त संचालकों (जेडी) और 33 जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
कार्रवाई में लापरवाही पर अधिकारियों को नोटिस
लोक शिक्षण संचालनालय ने पाया कि कई बार निर्देश जारी किए जाने के बावजूद जिला और संभाग स्तर के अधिकारियों ने अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की। विभाग का कहना है कि अधिकारियों ने न तो समय पर आवश्यक प्रतिवेदन भेजे और न ही कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज संचालनालय को उपलब्ध कराए। इसे अधिकारियों की गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1965 के उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है। विभाग ने पूछा है कि इस लापरवाही के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
समय-सीमा के बाद भी स्कूलों में नहीं पहुंचे शिक्षक
शासन ने स्थानांतरण और पदस्थापना के बाद शिक्षकों को नए विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने के लिए निर्धारित समय दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक और व्याख्याता नई पदस्थापना वाले स्कूलों में नहीं पहुंचे। इससे कई स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हुई है। विभाग का मानना है कि इससे युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य कमजोर हो रहा है और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
तीन दिन में प्रतिवेदन, एक सप्ताह में जवाब देने के निर्देश
लोक शिक्षण संचालनालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों और व्याख्याताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन तीन दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाए। इसके साथ आरोप पत्र, साक्ष्य और अन्य आवश्यक अभिलेख भी भेजने होंगे। नोटिस प्राप्त अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। यदि निर्धारित अवधि में जवाब नहीं दिया गया तो मामला सीधे शासन को भेजा जाएगा।
134 प्राथमिक शिक्षक अब तक नहीं पहुंचे स्कूल
विभागीय आंकड़ों के अनुसार युक्तियुक्तकरण के बाद भी 273 से अधिक शिक्षक अपनी नई पदस्थापना वाले विद्यालयों में जॉइन नहीं कर पाए हैं। इनमें सबसे अधिक 134 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा 71 व्याख्याता, 42 शिक्षक वर्ग-2, 15 प्रधान पाठक और एक प्राचार्य ने भी अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इन सभी मामलों में वेतन रोकने समेत अन्य विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
राज्य सरकार ने प्रदेश के 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण कर 16,165 शिक्षकों का समायोजन किया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना था। लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षकों के जॉइन नहीं करने से कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विभाग का कहना है कि यह स्थिति विद्यार्थियों के हितों के विपरीत है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।