छत्तीसगढ़ और झारखंड में लंबे समय से सक्रिय माओवादी संगठन को सुरक्षा बलों ने बड़ी चोट पहुंचाई है। झारखंड पुलिस ने डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के इनामी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षा एजेंसियों ने सारंडा के जंगलों में चलाए गए विशेष सर्च ऑपरेशन के दौरान उसे उसके दो सहयोगियों के साथ दबोच लिया। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई लंबे समय तक चली खुफिया निगरानी और सटीक सूचना के आधार पर की गई।
डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी
मिसिर बेसरा माओवादी संगठन के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो (ERB) का प्रभारी था और झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में संगठन की गतिविधियों के संचालन में अहम भूमिका निभाता था। उसकी गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मिसिर बेसरा पर पश्चिम सिंहभूम जिले में हुए आईईडी (IED) विस्फोट की साजिश रचने का आरोप है, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इसके अलावा उसके खिलाफ हत्या, विस्फोट, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, आर्म्स एक्ट तथा अन्य गंभीर धाराओं के तहत 100 से अधिक मामले दर्ज हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, वह कई वर्षों से माओवादी संगठन का प्रमुख रणनीतिकार रहा है और अनेक बड़े नक्सली हमलों की योजना बनाने में उसकी भूमिका सामने आती रही है। इसी कारण वह सुरक्षा बलों की सबसे वांछित सूची में शामिल था।
2009 में लखीसराय कोर्ट परिसर से छुड़ाया गया था
मिसिर बेसरा का नाम वर्ष 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर हुए नक्सली हमले के बाद सुर्खियों में आया था। उस दौरान नक्सलियों ने पुलिस पर हमला कर उसे हिरासत से छुड़ा लिया था। इसके बाद वह लगातार फरार रहा और विभिन्न राज्यों में माओवादी गतिविधियों का संचालन करता रहा।
सुरक्षा एजेंसियां पिछले कई वर्षों से उसकी तलाश में जुटी थीं और उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही थीं। आखिरकार सारंडा क्षेत्र में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान उसे गिरफ्तार करने में सफलता मिली।
बस्तर में माओवादी नेटवर्क को मजबूत करने में निभाई अहम भूमिका
जांच एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा पिछले लगभग दो दशकों से झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के जंगलों में सक्रिय था। बस्तर क्षेत्र में माओवादी संगठन को मजबूत करने, नए कैडरों की भर्ती, उन्हें सैन्य प्रशिक्षण देने, हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और बड़े हमलों की रणनीति तैयार करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वह माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा था और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी तथा पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी संभालता था। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां उसे संगठन का बेहद प्रभावशाली नेता मानती थीं।
गिरफ्तारी के बाद बीजापुर में 8 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के अगले ही दिन छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आठ नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें पांच महिला नक्सली भी शामिल हैं। इन सभी पर कुल 49 लाख रुपये का इनाम घोषित था।आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख और 5-5 लाख रुपये का इनाम था।
पूछताछ से मिल सकते हैं कई अहम सुराग
सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के अधिकारियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से माओवादी संगठन के नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा। वह संगठन के शीर्ष निर्णय लेने वाले नेताओं में शामिल था और कई राज्यों में फैले नेटवर्क, हथियारों की आपूर्ति, फंडिंग और संगठन की रणनीति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां रखता है।
अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को संगठन के आर्थिक स्रोतों, हथियारों की सप्लाई चेन, सक्रिय कैडरों, ठिकानों और फरार बड़े माओवादी नेताओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इन सूचनाओं के आधार पर आने वाले समय में नक्सल विरोधी अभियान को और तेज करने की तैयारी की जा रही है।
नक्सल विरोधी अभियान को मिलेगी नई गति
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मिसिर बेसरा जैसे शीर्ष माओवादी नेता की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि माओवादी संगठन की रणनीतिक क्षमता पर सीधा प्रहार है। इससे संगठन की कमान, समन्वय व्यवस्था और नए कैडरों की भर्ती पर असर पड़ सकता है।
हाल के महीनों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों, बढ़ते आत्मसमर्पण और शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी से नक्सली संगठन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इस अभियान के और भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे तथा प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की प्रक्रिया को गति मिलेगी।