रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने की डिजिटल व्यवस्था अब वेतन भुगतान से भी जुड़ने जा रही है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जुलाई 2026 से शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का वेतन ऑनलाइन उपस्थिति रिकॉर्ड के आधार पर जारी किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य उपस्थिति प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया जा रहा है।
शिक्षकों ने जताई तकनीकी समस्याओं को लेकर चिंता
नई व्यवस्था के बाद शिक्षक संगठनों ने कई व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क की स्थिति कमजोर है। कई बार तकनीकी कारणों से वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप सही तरीके से काम नहीं करता, जिससे समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर वेतन जारी करने की व्यवस्था कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
शिक्षक संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने इस व्यवस्था को वर्तमान परिस्थितियों में अव्यावहारिक बताया है। संघ का कहना है कि जब तक नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक ऑनलाइन उपस्थिति को वेतन से जोड़ना उचित नहीं होगा। संगठन ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने की स्थिति में अगस्त महीने में विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
सरकार ने कहा- तकनीकी खामियां दूर की जाएंगी
मामले पर बढ़ते विवाद के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा है कि यदि कहीं तकनीकी दिक्कतें सामने आती हैं तो उन्हें दूर किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन स्थानों पर वास्तविक समस्याएं हैं, वहां समाधान निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि किसी कर्मचारी को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
विपक्ष ने सरकार की तैयारी पर उठाए सवाल
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस ने सरकार की नई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी डिजिटल प्रणाली को लागू करने से पहले उसकी तकनीकी तैयारी और आधारभूत सुविधाओं को पूरी तरह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि नेटवर्क और तकनीकी चुनौतियों के बीच वेतन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को ऑनलाइन उपस्थिति से जोड़ना कर्मचारियों के हित में नहीं माना जा सकता।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल शिक्षा विभाग का निर्देश जारी है और इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दूसरी ओर शिक्षक संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और तकनीकी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस व्यवस्था में क्या बदलाव करती है और शिक्षकों की आपत्तियों का समाधान किस तरह किया जाता है।