कोलकाता डेस्क: किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या है। खान-पान और लाइफस्टाइल को लेकर इससे जुड़ी कई तरह की बातें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं। इन्हीं में से एक दावा है कि प्याज के ऊपर या जड़ के पास मौजूद कठोर सफेद हिस्से को खाने से किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से कई लोग प्याज काटते समय इस हिस्से को निकालकर फेंक देते हैं। लेकिन क्या वाकई प्याज के इस सफेद हिस्से से किडनी स्टोन हो सकता है? इस दावे को लेकर न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
प्याज के सफेद हिस्से को लेकर क्या है दावा?
कई लोगों का मानना है कि प्याज के जड़ के पास मौजूद सफेद और कुछ सख्त हिस्से को खाने से शरीर में ऐसे तत्व बढ़ सकते हैं, जिनसे किडनी स्टोन बन सकता है। सोशल मीडिया पर भी इस तरह की बातें सामने आती रहती हैं। हालांकि, किसी खाद्य पदार्थ को केवल सोशल मीडिया पर वायरल दावों के आधार पर किडनी स्टोन का कारण मानना सही नहीं है। न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन के मुताबिक, प्याज के इस सफेद हिस्से को खाने से किडनी स्टोन होने का अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए केवल इस डर से प्याज के इस हिस्से को खाने से बचने की जरूरत नहीं है।
प्याज के सफेद हिस्से में क्या होता है?
लीमा महाजन के अनुसार, प्याज के सफेद हिस्से में भी प्याज के दूसरे हिस्सों की तरह कई सल्फर कंपाउंड्स पाए जाते हैं। प्याज में मौजूद ये यौगिक अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाने जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़ी प्रक्रियाओं पर असर डाल सकते हैं, जबकि एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन से जुड़े तंत्र में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इन गुणों का यह मतलब नहीं है कि प्याज किसी बीमारी का इलाज है। संतुलित डाइट के हिस्से के तौर पर प्याज का सेवन किया जा सकता है, लेकिन किसी भी खाद्य पदार्थ को बीमारी का इलाज या उससे बचाव की गारंटी मानना सही नहीं होगा।
फैट मेटाबॉलिज्म से भी जुड़े हैं प्याज के कुछ यौगिक
प्याज में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों का संबंध फैट मेटाबॉलिज्म से भी बताया जाता है। कुछ अध्ययनों में प्याज के कंपाउंड्स और ब्लड लिपिड यानी खून में मौजूद वसा से जुड़े संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई है। इनमें ट्राइग्लिसराइड के स्तर से जुड़े संभावित प्रभाव भी शामिल हैं। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि केवल प्याज का सफेद हिस्सा खाने से ट्राइग्लिसराइड कम हो जाएगा या किसी बीमारी से बचाव हो जाएगा, ऐसा दावा नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य पर असर डालने में पूरी डाइट, शारीरिक गतिविधि, वजन, उम्र और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं।
किडनी स्टोन बनने के पीछे कई कारण
किडनी स्टोन बनने का कोई एक कारण नहीं होता। शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी न होना यानी डिहाइड्रेशन पथरी के जोखिम को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कारण है। जब शरीर में पानी की कमी होती है तो पेशाब अधिक गाढ़ा हो सकता है और उसमें कुछ खनिजों की मात्रा बढ़ने से क्रिस्टल बनने की संभावना बढ़ सकती है। इसके अलावा पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सालेट या यूरिक एसिड जैसे पदार्थों का अधिक मात्रा में मौजूद होना भी कुछ प्रकार की पथरी के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारण, खान-पान, मोटापा और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी किडनी स्टोन बनने में भूमिका निभा सकती हैं।
हर व्यक्ति के लिए किडनी स्टोन का कारण एक जैसा नहीं
किडनी स्टोन अलग-अलग प्रकार की हो सकती है और हर व्यक्ति में इसके कारण भी अलग हो सकते हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को पहले से किडनी स्टोन की समस्या है, तो उसे अपनी डाइट खुद से बदलने के बजाय डॉक्टर या डाइट एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। किसी व्यक्ति के लिए कौन-सी चीज सीमित करनी है या किस तरह की डाइट रखनी है, यह स्टोन के प्रकार और उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर कर सकता है। इसलिए इंटरनेट या सोशल मीडिया पर वायरल किसी एक दावे के आधार पर पूरी तरह किसी खाद्य पदार्थ को डाइट से हटाना सही तरीका नहीं है।
क्या प्याज का सफेद हिस्सा खाना चाहिए?
उपलब्ध जानकारी और न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन की बताई बात के अनुसार, प्याज के सफेद हिस्से को खाने से किडनी स्टोन होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए सामान्य तौर पर इसे प्याज के दूसरे हिस्सों की तरह भोजन में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को पहले से किडनी स्टोन है या बार-बार पथरी बनती है, तो उसकी डाइट डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय होनी चाहिए। पर्याप्त पानी पीना और संतुलित खान-पान रखना भी किडनी की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।